🌾 फसल उत्पादन एवं प्रबंधन
महत्वपूर्ण बिंदु:
बढ़ती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने के लिए विशेष कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।
किसी स्थान पर उगाए जाने वाले एक ही प्रकार के पौधों को फसल कहते हैं।
भारत में फसलों को ऋतु के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जा सकता है: रबी और खरीफ फसल।
जुताई करके मिट्टी तैयार करना और उसे समतल बनाना आवश्यक है। इसके लिए गोबर और पुआल का उपयोग किया जाता है।
बीजों को उचित गहराई पर बोना और उनके बीच उचित दूरी रखना अच्छी उपज के लिए आवश्यक है। स्वस्थ बीजों का चयन करके बोया जाता है। सीड-ड्रिल की मदद से बुआई की जाती है।
मिट्टी में पोषक तत्वों की पुनः पूर्ति के लिए कार्बनिक खाद और उर्वरकों का उपयोग किया जाता है। नई फसल किस्मों के आने से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ गया है।
उचित समय और अंतराल पर फसल को पानी देना “सिंचाई” कहलाता है।
अनचाहे और बिना उगे पौधों को हटाना “खरपतवार” कहलाता है।
कटाई का अर्थ है पकी हुई फसल को हाथों या मशीन से काटना।
अनाज को भूसे से अलग करना “थ्रेशिंग” कहलाता है।
बीजों को कीटों और सूक्ष्मजीवों से बचाने के लिए उचित भंडारण आवश्यक है।
पशुओं को पालकर भी खाद्य सामग्री प्राप्त की जाती है। इसे “पशुपालन” कहते हैं।
1. फसल (Crop) क्या है?
- जब एक ही प्रकार के पौधों को बड़े पैमाने पर उगाया जाता है तो उसे फसल कहते हैं।
- भारत में मुख्यत: दो प्रकार की फसलें होती हैं:
- खरीफ फसलें (जैसे – धान, मक्का): वर्षा ऋतु (जुलाई–अक्टूबर) में बोई जाती हैं।
- रबी फसलें (जैसे – गेहूं, सरसों): सर्दियों (नवंबर–अप्रैल) में बोई जाती हैं।
2. फसल उत्पादन के प्रमुख चरण
- भूमि की जुताई – मिट्टी को खोदना और मुलायम बनाना।
- बीज का चयन – अच्छे, स्वस्थ और उच्च उत्पादन देने वाले बीजों का प्रयोग।
- बीज बोना – सीधा या मशीन से बोया जाता है।
- सिंचाई – जल की आपूर्ति (फव्वारा प्रणाली, ड्रिप प्रणाली आदि)।
- निराई-गुड़ाई – खरपतवारों (अनचाही घास) को हटाना।
- खाद और उर्वरक डालना – पौधों को पोषण देने के लिए।
- फसल की सुरक्षा – कीट और रोगों से फसल की रक्षा।
- कटाई (Harvesting) – पकने के बाद फसल को काटना।
- भंडारण (Storage) – अनाज को सूखा कर सुरक्षित स्थान पर रखना।
3. सिंचाई की आधुनिक विधियाँ
- स्प्रिंकलर प्रणाली – सूखे क्षेत्रों में उपयोगी, फव्वारे की तरह पानी छिड़कता है।
- ड्रिप प्रणाली – पौधे की जड़ों तक धीरे-धीरे पानी पहुँचाता है, जल की बचत होती है।
4. खाद और उर्वरक
- खाद (Manure) – जैविक, प्राकृतिक तरीकों से बनती है।
- उर्वरक (Fertilizer) – रासायनिक तत्वों से तैयार, तीव्र प्रभावी।
5. भंडारण की विधियाँ
- अनाज को धूप में सुखा कर, बोरियों में या साइलो (गोदामों) में रखा जाता है।
- नमी और कीटों से सुरक्षा के उपाय अपनाए जाते हैं।
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अभ्यास प्रश्नों के उत्तर
1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(क) एक स्थान पर एक ही प्रकार के बड़ी मात्रा में उगाए गए पौधों को फसल कहते हैं।
(ख) फसल उगाने से पहले पहला चरण मिट्टी की तैयारी होती है।
(ग) खराब बीज पानी की सतह पर तैरेंगे।
(घ) फसल उगाने के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश और मिट्टी से पोषक तत्व तथा पानी आवश्यक हैं।
2. स्तंभ A का स्तंभ B से मिलान कीजिए:
स्तंभ A | स्तंभ B |
---|---|
(i) खरीफ फसल | (d) धान, मक्का |
(ii) रबी फसल | (e) गेहूँ, चना |
(iii) रासायनिक उर्वरक | (b) यूरिया, सुपर फॉस्फेट |
(iv) कार्बनिक खाद | (c) गोबर, पशु अपशिष्ट |
3. निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिए:
(क) खरीफ फसल:
- धान
- मक्का
(ख) रबी फसल:
- गेहूँ
- सरसों
4. निम्नलिखित पर एक-एक अनुच्छेद लिखिए:
(क) मिट्टी तैयार करना:
मिट्टी तैयार करने के लिए सबसे पहले जुताई की जाती है, जिससे मिट्टी ढीली हो जाती है और हवा व पानी का संचार बेहतर होता है। इसमें गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाया जाता है।
(ख) बुआई:
बुआई के लिए स्वस्थ बीजों का चयन किया जाता है। बीजों को उचित गहराई और दूरी पर बोया जाता है। आधुनिक तकनीक में सीड-ड्रिल का उपयोग किया जाता है।
(ग) निराई:
निराई में खरपतवार (अनचाहे पौधे) हटाए जाते हैं, जो फसल के पोषक तत्वों को चुरा लेते हैं। इसे हाथ या खुरपी से किया जाता है।
(घ) थ्रेशिंग:
थ्रेशिंग में कटी हुई फसल से अनाज को भूसे से अलग किया जाता है। पहले यह हाथ से किया जाता था, लेकिन अब थ्रेशर मशीन का उपयोग होता है।
5. उर्वरक और खाद में अंतर स्पष्ट कीजिए:
खाद | उर्वरक |
---|---|
यह प्राकृतिक होता है (जैसे गोबर, कंपोस्ट)। | यह रासायनिक होता है (जैसे यूरिया)। |
इसमें पोषक तत्व कम मात्रा में होते हैं। | इसमें पोषक तत्व अधिक केंद्रित होते हैं। |
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है। | तुरंत पोषण प्रदान करता है। |
6. सिंचाई किसे कहते हैं? जल संरक्षित करने वाली सिंचाई की दो विधियाँ बताइए।
सिंचाई: फसल को निश्चित अंतराल पर पानी देना सिंचाई कहलाता है।
जल संरक्षण विधियाँ:
- ड्रिप सिंचाई: पाइपों द्वारा पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुँचाया जाता है।
- स्प्रिंकलर सिंचाई: पानी को फव्वारे की तरह छिड़का जाता है, जिससे कम पानी खर्च होता है।
7. यदि गेहूँ को खरीफ ऋतु में उगाया जाए तो क्या होगा?
- गेहूँ रबी की फसल है, जिसे सर्दियों में उगाया जाता है।
- यदि इसे खरीफ (वर्षा ऋतु) में बोया जाए, तो अधिक वर्षा और नमी के कारण फसल खराब हो सकती है।
- कीटों और फफूंदी का प्रकोप बढ़ सकता है।
8. खेत में लगातार फसल उगाने से मिट्टी पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- मिट्टी के पोषक तत्व समाप्त हो जाते हैं।
- उत्पादकता कम हो जाती है।
- मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
- समाधान: फसल चक्र अपनाना चाहिए।
9. खरपतवार क्या हैं? इनका नियंत्रण कैसे करें?
खरपतवार: अनचाहे पौधे जो फसल के साथ उग आते हैं और पोषक तत्व चुरा लेते हैं।
नियंत्रण के तरीके:
- निराई: हाथ या खुरपी से निकालना।
- खरपतवारनाशक: रासायनिक दवाओं का छिड़काव।
10. गेहूँ की फसल उगाने का सही क्रम:
- खेत की जुताई करना
- मिट्टी तैयार करना
- बीज बोना
- सिंचाई करना
- खाद/उर्वरक देना
- निराई करना
- कटाई करना
11. पहेली को पूरा कीजिए:
ऊपर से नीचे:
- कुएँ से सिंचाई
- पशुपालन
- खरीफ फसल
- कटाई
बाएँ से दाएँ:
- रबी फसल
- एकल कृषि
- उर्वरक
- निराई
यदि किसी प्रश्न में और स्पष्टीकरण चाहिए, तो बताएँ! 😊
📘 महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न
- फसल उत्पादन के प्रमुख चरणों को क्रम में लिखिए।
- खाद और उर्वरक में क्या अंतर है?
- स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली की विशेषताएँ बताइए।
- खरीफ और रबी फसलों में अंतर दीजिए।
- अच्छे बीजों का चयन क्यों जरूरी है?