🧾 अध्याय का सारांश (Summary in Easy Hindi)
- जनन (Reproduction)
- जनन वह प्रक्रिया है जिससे जीव अपनी समान संतान उत्पन्न करते हैं।
- यह जीव के अस्तित्व को बनाए रखता है।
- डी.एन.ए. (DNA) का महत्व
- डी.एन.ए. में जीव के वंशानुगत गुणों की जानकारी होती है।
- जनन में डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनती है जिससे नए जीव का निर्माण होता है।
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
- इसमें केवल एक माता-पिता की आवश्यकता होती है।
- संतति आनुवंशिक रूप से समान होती है।
- इसके प्रकार हैं—
- द्विखंडन (Binary Fission) — अमीबा, पैरामीशियम
- बहुखंडन (Multiple Fission) — प्लास्मोडियम
- खंडन (Fragmentation) — स्पाइरोगाइरा
- पुनरुद्भवन (Regeneration) — प्लेनेरिया
- मुकुलन (Budding) — यीस्ट, हाइड्रा
- बीजाणुजनन (Spore formation) — राइजोपस (ब्रेड मोल्ड)
- कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) — आलू, गाजर, गुलाब आदि
- लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
- इसमें दो माता-पिता (नर और मादा) भाग लेते हैं।
- इससे नई आनुवंशिक विविधता आती है।
- इसमें गैमेट्स (युग्मक) का संलयन होता है जिससे जायगोट (zygote) बनता है।
- पौधों में लैंगिक जनन
- फूल पौधों का जनन अंग है।
- परागण (Pollination) – परागकण का वर्तिकाग्र पर गिरना
- स्वपरागण – एक ही फूल में
- परपरागण – एक फूल से दूसरे फूल तक
- निषेचन (Fertilization) – नर युग्मक + मादा युग्मक → जायगोट
- बीज और फल का निर्माण होता है।
- मनुष्यों में लैंगिक जनन
- नर जनन तंत्र – वृषण (Testes), शुक्राणु (Sperm), लिंग (Penis)
- मादा जनन तंत्र – अंडाशय (Ovary), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina)
- निषेचन आंतरिक होता है।
- गर्भावस्था लगभग 9 महीने की होती है।
- भ्रूण को प्लेसेंटा (Placenta) द्वारा पोषण मिलता है।
- यौवन (Puberty) और जनन स्वास्थ्य
- शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं (लड़कों में टेस्टोस्टेरोन, लड़कियों में इस्ट्रोजन)।
- स्वच्छता और जनसंख्या नियंत्रण महत्वपूर्ण हैं।
📘 महत्वपूर्ण नोट्स (Important Notes)
| विषय | प्रमुख बिंदु |
|---|---|
| डी.एन.ए. | वंशानुगत गुणों का वाहक |
| अलैंगिक जनन | एक ही जीव से नई संतति |
| लैंगिक जनन | दो जीवों की भागीदारी से |
| निषेचन | नर और मादा युग्मकों का मिलन |
| परागण | परागकण का वर्तिकाग्र पर पहुँचना |
| भ्रूण | जायगोट से विकसित होता है |
| प्लेसेंटा | भ्रूण को पोषण देने वाली संरचना |
| जनन स्वास्थ्य | स्वच्छता, संतुलित आहार और सुरक्षित व्यवहार आवश्यक |
✍️ CBSE परीक्षा हेतु प्रश्न-उत्तर
🔹 लघु प्रश्न (1 मार्क वाले)
- जनन क्या है?
👉 जीवों द्वारा अपनी संतति उत्पन्न करने की प्रक्रिया जनन कहलाती है। - डी.एन.ए. की भूमिका क्या है?
👉 यह वंशानुगत गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी में ले जाता है। - अमीबा में जनन किस प्रकार होता है?
👉 द्विखंडन (Binary Fission) द्वारा। - स्पाइरोगाइरा में जनन की विधि क्या है?
👉 खंडन (Fragmentation)। - मनुष्यों में निषेचन कहाँ होता है?
👉 अंडवाहिनी (Fallopian Tube) में।
🔹 मध्यम प्रश्न (3 मार्क वाले)
- लैंगिक जनन और अलैंगिक जनन में अंतर लिखिए।
| लैंगिक जनन | अलैंगिक जनन |
|---|---|
| दो माता-पिता की आवश्यकता | एक माता-पिता पर्याप्त |
| आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है | सभी संतति समान |
| युग्मकों का संलयन होता है | कोषिका विभाजन द्वारा |
- बीजाणुजनन क्या है?
👉 राइजोपस जैसे जीवों में बीजाणु बनते हैं। ये अनुकूल स्थिति में नए जीव उत्पन्न करते हैं। - परागण के प्रकार लिखिए।
👉 (i) स्वपरागण (Self Pollination)
👉 (ii) परपरागण (Cross Pollination) - यौवन अवस्था में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं?
👉 लड़कों में दाढ़ी-मूँछ, भारी आवाज़, शुक्राणु उत्पादन; लड़कियों में स्तन विकास, रजोधर्म (menstruation)।
🔹 दीर्घ प्रश्न (5 मार्क वाले)
- मनुष्य के नर और मादा जनन तंत्र का वर्णन चित्र सहित कीजिए।
👉 नर तंत्र में वृषण, शुक्रवाहिनी, लिंग, और शुक्राणु;
मादा तंत्र में अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, योनि शामिल हैं।
(चित्र सहित विवरण) - पौधों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया समझाइए।
👉- परागकण का स्थानांतरण (परागण)
- निषेचन → जायगोट
- बीज व फल का निर्माण
- बीज का अंकुरण → नया पौधा
- अलैंगिक जनन के प्रकारों को उदाहरण सहित समझाइए।
👉- द्विखंडन – अमीबा
- बहुखंडन – प्लास्मोडियम
- मुकुलन – यीस्ट, हाइड्रा
- खंडन – स्पाइरोगाइरा
- बीजाणुजनन – राइजोपस
- कायिक प्रवर्धन – आलू, गुलाब
ज़रूर 😊 नीचे दिए गए हैं —
“CBSE बोर्ड में बार-बार पूछे जाने वाले प्रमुख टॉपिक”
का बहुत आसान हिंदी संस्करण (Exam के लिए याद रखने लायक भाषा में) 👇
📘 अध्याय – जीव जनन कैसे करते हैं (Chapter 7)
🧠 CBSE बोर्ड में बार-बार पूछे गए प्रमुख टॉपिक (Easy Hindi Notes)
🌱 1. लैंगिक और अलैंगिक जनन में अंतर
| क्रमांक | लैंगिक जनन | अलैंगिक जनन |
|---|---|---|
| 1️⃣ | इसमें दो जीव (नर और मादा) भाग लेते हैं। | इसमें केवल एक जीव भाग लेता है। |
| 2️⃣ | इसमें निषेचन (Fertilization) होता है। | इसमें कोशिका विभाजन से नई संतति बनती है। |
| 3️⃣ | इससे नई विविधता (differences) पैदा होती है। | इससे समान प्रकार की संतति बनती है। |
| 🧩 उदाहरण | मनुष्य, फूलदार पौधे | अमीबा, यीस्ट, स्पाइरोगाइरा |
🌺 2. पौधों में परागण और निषेचन की प्रक्रिया
- परागण (Pollination):
यह वह प्रक्रिया है जिसमें फूल के पुंकेसर से परागकण (pollen grain)
फूल के वर्तिकाग्र (stigma) पर पहुँचता है। - परागण के दो प्रकार:
- स्वपरागण (Self Pollination) – एक ही फूल में।
- परपरागण (Cross Pollination) – एक फूल से दूसरे फूल में।
- निषेचन (Fertilization):
नर युग्मक (male gamete) और मादा युग्मक (female gamete) के मिलने से
जायगोट (zygote) बनता है, जिससे बीज (seed) बनता है।
👩🔬 3. मनुष्य के जनन तंत्र (Reproductive System)
🔹 नर जनन तंत्र:
- मुख्य अंग — वृषण (Testes), शुक्रवाहिनी (Sperm Duct), लिंग (Penis)
- शुक्राणु वृषण में बनते हैं और शुक्रवाहिनी से बाहर निकलते हैं।
🔹 मादा जनन तंत्र:
- मुख्य अंग — अंडाशय (Ovary), अंडवाहिनी (Fallopian Tube), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina)
- अंडाशय से अंडाणु (Egg) निकलता है।
- निषेचन अंडवाहिनी में होता है।
- भ्रूण (Embryo) गर्भाशय में विकसित होता है।
🧬 4. बीजाणुजनन और कायिक प्रवर्धन
🔹 बीजाणुजनन (Spore Formation):
- यह प्रक्रिया राइजोपस (ब्रेड मोल्ड) जैसे कवक में होती है।
- बीजाणु (spores) थैली में बनते हैं और अनुकूल स्थिति में नए जीव बनाते हैं।
🔹 कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation):
- पौधे के जड़, तना या पत्ती के भाग से नया पौधा बनता है।
- उदाहरण: आलू (Potato), गुलाब (Rose), गन्ना (Sugarcane)।
- इस तरीके से पौधे जल्दी और समान रूप से उगते हैं।
🩸 5. रजोधर्म (Menstruation) और उसका महत्व
- जब निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत टूटकर रक्त के रूप में बाहर निकलती है।
- इस प्रक्रिया को रजोधर्म या मासिक धर्म कहते हैं।
- यह हर 28 दिन में होती है।
- इसका उद्देश्य — गर्भाशय को हर माह नए भ्रूण के लिए तैयार करना।
👨👩👧 6. जनसंख्या नियंत्रण और जनन स्वास्थ्य
- जनन स्वास्थ्य का अर्थ है — शरीर और मन दोनों का स्वस्थ और जिम्मेदार व्यवहार।
- जनसंख्या नियंत्रण के उपाय:
- कंडोम या कॉपर-T जैसे साधन का उपयोग
- परिवार नियोजन
- विवाह की सही उम्र (लड़कियाँ – 18 वर्ष, लड़के – 21 वर्ष)
- जनन के बीच उचित अंतर