अध्याय 8: विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’
अध्याय 8: विविधता में एकता या ‘एक में अनेक’ पुस्तक: समाज का अध्ययन: भारत और उसके आगे (Exploring Society) मुख्य विचार (Core Concept): यह अध्याय समझाता है कि भारत में ऊपर से देखने पर बहुत अंतर (विविधता) हैं, लेकिन गहराई में हम सब एक हैं। श्री अरविंद ने इसे भारत का “स्वाभाविक स्वभाव” कहा है। … Read more