जाति, धर्म और लैंगिक मुद्दे

  🌿 अध्याय का सारांश जाति, धर्म और लैंगिक मुद्दे यह अध्याय बताता है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में लिंग (Gender), धर्म (Religion) और जाति (Caste) कैसे सामाजिक असमानता के प्रमुख आधार हैं और राजनीति में इनकी क्या भूमिका है। लोकतंत्र में इन असमानताओं की अभिव्यक्ति बुरी नहीं होती — बल्कि कई बार यह … Read more

संघवाद

  🟩 अध्याय 2: संघवाद (Federalism)  संघवाद का अर्थ: संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सत्ता दो या उससे अधिक स्तरों में बाँटी जाती है — जैसे केंद्र (Union) और राज्य (State)। एकात्मक और संघीय शासन में अंतर: एकात्मक शासन में सारी शक्ति केंद्र के पास होती है (जैसे ब्रिटेन)। संघीय शासन में केंद्र … Read more

मुद्रण की क्रांति, संस्कृति और राजनीति

  🌿 अध्याय का सारांश -मुद्रण की क्रांति, संस्कृति और राजनीति यह अध्याय बताता है कि मुद्रण कला (Printing Press) ने किस तरह मानव सभ्यता, संस्कृति, समाज और राजनीति में परिवर्तन लाया। सबसे पहले छपाई की शुरुआत चीन, जापान और कोरिया में हुई थी, जहाँ लकड़ी की तख्तियों (woodblocks) से किताबें छपती थीं। फिर जोहान्स … Read more

औद्योगिकीकरण का युग

  🟩 सारांश (औद्योगिकीकरण का युग) औद्योगिकीकरण का अर्थ है – मशीनों और कारखानों द्वारा वस्तुओं का उत्पादन। यह प्रक्रिया 18वीं सदी में यूरोप, विशेषकर इंग्लैंड से प्रारंभ हुई। इससे पहले वस्तुएँ हाथ से (हथकरघा, घरेलू उद्योगों में) बनाई जाती थीं। धीरे-धीरे नई मशीनें जैसे स्पिनिंग जेनी, स्टीम इंजन आदि आईं जिससे उत्पादन तेजी से … Read more

वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण

  🌍 अध्याय का संक्षिप्त सारांश वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण यह अध्याय बताता है कि कैसे 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच व्यापार, औद्योगिकीकरण, उपनिवेशवाद और प्रवास के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) का निर्माण हुआ। प्राचीन काल में देशों के बीच व्यापार का आदान–प्रदान ज़मीन और समुद्री मार्गों से होता था — जैसे सिल्क … Read more

भारत में राष्ट्रीय आंदोलन

भारत में राष्ट्रीय आंदोलन (Indian Nationalism in India)  🟩 अध्याय सारांश  प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) युद्ध के दौरान भारत पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। कर बढ़ाए गए, महँगाई बढ़ी, लोगों में असंतोष फैला। महात्मा गांधी का आगमन (1915) दक्षिण अफ्रीका से लौटकर गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों पर आंदोलन शुरू किया। उन्होंने चंपारण … Read more

राष्ट्रीयता का उदय

“राष्ट्रीयता का उदय (Nationalism in Europe)” 🧭 संक्षिप्त सारांश  18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में लोगों ने यह समझना शुरू किया कि वे केवल किसी राजा के अधीन नहीं बल्कि एक राष्ट्र (Nation) का हिस्सा हैं। फ्रांसीसी क्रांति (1789) ने यह विचार फैलाया कि “राष्ट्र के नागरिक समान अधिकारों के पात्र हैं”। धीरे-धीरे यह … Read more

उपभोक्ता अधिकार

अध्याय 5: उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ता का परिचय बाजार में जब कोई व्यक्ति अपनी आवश्यकता के लिए कोई वस्तु या सेवा खरीदता है, तो वह उपभोक्ता कहलाता है. बाजार में उपभोक्ता और उत्पादक दोनों की भागीदारी होती है. उत्पादक वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण करते हैं, जबकि उपभोक्ता उनका उपभोग करते हैं. उपभोक्ता आंदोलन भारत में … Read more

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था 

🌍 अध्याय 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था ✨ वैश्वीकरण क्या है? परिभाषा: वैश्वीकरण का अर्थ है – देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और सूचना का मुक्त और तीव्र आवागमन। इसमें वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है। 🌐 वैश्वीकरण के प्रमुख तत्व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात। … Read more

मुद्रा और साख

अध्याय 3: मुद्रा और साख 1. विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा वस्तु विनिमय प्रणाली वह प्रणाली थी जिसमें मुद्रा का उपयोग किए बिना वस्तुओं का सीधे आदान-प्रदान किया जाता था. इस प्रणाली में व्यापार करने के लिए, “आवश्यकताओं के दोहरे संयोग” की आवश्यकता होती थी, जिसका अर्थ है कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे … Read more