अध्याय 2: आँकड़ों का संग्रह (S)
1. चर एवं प्रेक्षण (Variable & Observation)
- चर (Variable): वे मूल्य जो परिवर्तनशील होते हैं और समय अथवा परिस्थिति के साथ बदलते रहते हैं, उन्हें चर कहा जाता है (जैसे—विभिन्न वर्षों में खाद्यान्न का उत्पादन या अलग-अलग व्यक्तियों की आय)। इन्हें $X, Y, Z$ द्वारा दर्शाया जाता है।
- प्रेक्षण (Observation): चर के किसी विशिष्ट मूल्य को प्रेक्षण कहते हैं।
2. आँकड़ों के स्रोत (Sources of Data)
- प्राथमिक आँकड़े (Primary Data): वे आँकड़े जो अनुसंधानकर्ता (गणनाकार) द्वारा स्वयं पहली बार प्रत्यक्ष रूप से मौलिक रूप से संगृहीत किए जाते हैं।
- उदाहरण: विद्यार्थियों से सीधे पूछताछ करके प्राप्त किए गए आँकड़े।
- द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data): वे आँकड़े जो पहले ही किसी अन्य संस्था या व्यक्ति द्वारा संगृहीत और संसाधित किए जा चुके होते हैं तथा अनुसंधानकर्ता उनका उपयोग करता है।
- स्रोत: सरकारी रिपोर्ट, समाचार पत्र, वेबसाइट, CSO, NSSO आदि। इससे समय और धन की बचत होती है।
3. सर्वेक्षण और प्रश्नावली निर्माण (Survey & Questionnaire Design)
सर्वेक्षण विभिन्न व्यक्तियों से सूचनाएं एकत्र करने की एक विधि है। प्रश्नावली बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें:
- सरलता और संक्षिप्तता: प्रश्नों की संख्या कम होनी चाहिए और भाषा स्पष्ट व सरल होनी चाहिए।
- सामान्य से विशिष्ट की ओर: शुरुआत सामान्य प्रश्नों से होकर धीरे-धीरे विशिष्ट प्रश्नों की ओर बढ़नी चाहिए।
- दोहरी नकारात्मकता और संकेतक प्रश्नों से बचाव: प्रश्नों की शुरुआत “क्या आप नहीं सोचते…” से नहीं करनी चाहिए और न ही उत्तरदाता को कोई संकेत देना चाहिए।
- प्रश्नों के प्रकार:
- संरचित / परिमितोत्तर प्रश्न (Structured Questions): इनमें उत्तर सीमित होते हैं, जैसे—द्विविध (हाँ/नहीं) या बहुविकल्पी प्रश्न।
- असंरचित / मुक्तोत्तर प्रश्न (Unstructured / Open-ended Questions): इनमें उत्तरदाता को अपनी राय विस्तार से व्यक्त करने की स्वतंत्रता होती है।
4. आँकड़ा-संग्रह की विधियाँ (Methods of Data Collection)
| विधि | लाभ | सीमाएँ/कमियाँ |
| 1. वैयक्तिक साक्षात्कार (Personal Interview) | • प्रत्यक्ष संपर्क व उच्च उत्तर दर
• अस्पष्ट प्रश्नों का स्पष्टीकरण संभव। | • अत्यधिक खर्चीली विधि
• अधिक समय लगता है तथा पक्षपात की संभावना। |
| 2. डाक द्वारा प्रश्नावली भेजना (Mailing Questionnaire) | • बहुत कम खर्चीली
• दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँच संभव। | • निरक्षरों हेतु अनुपयोगी
• उत्तर न मिलने (Non-response) की संभावना। |
| 3. टेलीफोन साक्षात्कार (Telephone Interview) | • कम खर्चीली व तीव्र गति
• संकोची उत्तरदाताओं के लिए बेहतर। | • केवल टेलीफोन धारकों तक सीमित
• दृश्य प्रतिक्रियाएँ देखना असंभव। |
प्रायोगिक सर्वेक्षण (Pilot Survey): मुख्य सर्वेक्षण से पूर्व एक छोटे समूह पर प्रश्नावली का परीक्षण करना प्रायोगिक सर्वेक्षण कहलाता है। इससे प्रश्नावली की कमियों, समय और लागत का पूर्व-अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
5. जनगणना एवं प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Census vs Sample Survey)
- जनगणना विधि (Census Method): वह सर्वेक्षण जिसके अंतर्गत समष्टि (Population) की प्रत्येक इकाई का अध्ययन किया जाता है।
- उदाहरण: भारत की दशकीय जनगणना (हर 10 वर्ष में)।
- प्रतिदर्श सर्वेक्षण (Sample Survey): समष्टि में से चुने गए एक छोटे प्रतिनिधि समूह (Sample) का अध्ययन किया जाता है।
- लाभ: कम खर्च, कम समय और सघन जांच संभव।
6. प्रतिचयन की विधियाँ (Sampling Methods)
- यादृच्छिक प्रतिचयन (Random Sampling): इस विधि में समष्टि की प्रत्येक इकाई के प्रतिदर्श में चुने जाने की समान संभावना होती है (जैसे—लॉटरी विधि या कंप्यूटर प्रोग्राम)। यह पक्षपात-रहित होती है।
- अयादृच्छिक प्रतिचयन (Non-Random Sampling): इस विधि में इकाइयों का चयन अनुसंधानकर्ता की सुविधा, निर्णय या पूर्वाग्रह के आधार पर होता है; सभी इकाइयों को चुने जाने का समान अवसर नहीं मिलता।
7. सांख्यिकीय त्रुटियाँ (Statistical Errors)
- प्रतिचयन त्रुटियाँ (Sampling Errors): यह त्रुटि केवल प्रतिदर्श के आकार और वास्तविक समष्टि मूल्य (Parametric value) के बीच अंतर के कारण उत्पन्न होती है। इसे प्रतिदर्श का आकार (Sample size) बढ़ाकर कम किया जा सकता है।
- अप्रतिचयन त्रुटियाँ (Non-Sampling Errors): ये त्रुटियाँ आँकड़ा अर्जन, गलत रिकॉर्डिंग, उत्तर न मिलने (Non-response) या पक्षपात के कारण होती हैं। यह प्रतिचयन त्रुटियों की तुलना में अधिक गंभीर होती हैं क्योंकि इन्हें प्रतिदर्श का आकार बढ़ाकर दूर नहीं किया जा सकता (ये जनगणना में भी हो सकती हैं)।
8. भारत में आंकड़े संगृहीत करने वाली प्रमुख संस्थाएँ
- भारत की जनगणना (Census of India): RGI द्वारा आयोजित; जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराती है।
- राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO): सामाजिक-आर्थिक मुद्दों (रोजगार, गरीबी, उपभोग व्यय) पर राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षण करता है तथा ‘सर्वेक्षण’ नामक पत्रिका प्रकाशित करता है।
- केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (CSO)।
📖 महत्वपूर्ण परिभाषाएँ (Important Definitions)
- प्राथमिक आँकड़े (Primary Data): अनुसंधानकर्ता द्वारा स्वयं अनुसंधान के स्थान पर जाकर पहली बार मौलिक रूप से एकत्र किए गए आँकड़े।
- द्वितीयक आँकड़े (Secondary Data): वे आंकड़े जो पहले से प्रकाशित या अप्रकाशित स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं।
- समष्टि (Population / Universe): सांख्यिकी में किसी अध्ययन के क्षेत्र में आने वाली सभी मदों या इकाइयों का समग्र समूह।
- प्रतिदर्श (Sample): समष्टि में से चुना गया वह छोटा प्रतिनिधि भाग जिसका अध्ययन पूरी समष्टि के निष्कर्ष निकालने के लिए किया जाता है।
- प्रायोगिक सर्वेक्षण (Pilot Survey): प्रश्नावली की कमियों को जानने के लिए मुख्य सर्वेक्षण से पहले किया जाने वाला एक लघु सर्वेक्षण।
📝 अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (Back Exercise Solutions)
प्रश्न 2: पाँच द्विमार्गी प्रश्नों की रचना करें (हाँ / नहीं के साथ)।
उत्तर:
- क्या आपके पास अपना निजी वाहन है? (हाँ / नहीं)
- क्या आप नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ते हैं? (हाँ / नहीं)
- क्या आपने ऑनलाइन खरीदारी की है? (हाँ / नहीं)
- क्या आप धूम्रपान करते हैं? (हाँ / नहीं)
- क्या आप अपने विद्यालय की पुस्तकालय सुविधाओं से संतुष्ट हैं? (हाँ / नहीं)
प्रश्न 3: सही विकल्प को चिह्नित करें:
(क) आँकड़ों के अनेक स्त्रोत होते हैं। सही
(ख) आँकड़ा-संग्रह के लिए टेलीफोन सर्वेक्षण सर्वाधिक उपयुक्त विधि है, विशेष रूप से जहाँ पर जनता निरक्षर हो और दूर-दराज के काफी बड़े क्षेत्रों में फैली हो।गलत (टेलीफोन हर निरक्षर व्यक्ति के पास उपलब्ध होना आवश्यक नहीं; वहाँ प्रत्यक्ष साक्षात्कार अधिक उपयुक्त है।)
(ग) सर्वेक्षक/शोधकर्ता द्वारा संग्रह किए गए आँकड़े द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं। गलत (वे प्राथमिक आंकड़े कहलाते हैं।)
(घ) प्रतिदर्श के अयादृच्छिक चयन में पूर्वाग्रह (अभिनति) की संभावना रहती है। सही
(ङ) अप्रतिचयन त्रुटियों को बड़ा प्रतिदर्श अपनाकर कम किया जा सकता है। गलत (प्रतिचयन त्रुटियों को प्रतिदर्श बढ़ाकर कम किया जा सकता है, अप्रतिचयन त्रुटियों को नहीं।)
प्रश्न 4: निम्नलिखित प्रश्नों में कोई समस्या दिख रही है? यदि हाँ, तो कैसे?
(क) आप अपने सबसे नजदीक के बाजार से कितनी दूर रहते हैं?
समस्या: प्रश्न स्पष्ट नहीं है कि दूरी किलोमीटर में पूछी गई है या समय में। उत्तर के विकल्प भी नहीं दिए गए हैं।
(ख) यदि हमारे कूड़े में प्लास्टिक थैलियों की मात्रा 5 प्रतिशत है तो क्या इन्हें निषेधित किया जाना चाहिए?
समस्या: यह एक संकेतक (Leading) प्रश्न है जो उत्तरदाता को प्रतिबंधित करने का संकेत देता है।
(ग) क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध नहीं करेंगे?
समस्या: यह दोहरी नकारात्मकता (Double Negative) वाला प्रश्न है, जिससे भ्रम उत्पन्न होता है।
प्रश्न 6: 200 फार्म वाले एक गाँव में 50 फार्मों का सर्वेक्षण किया गया। समष्टि एवं प्रतिदर्श के आकार क्या हैं?
उत्तर:
- समष्टि का आकार (Population Size, $N$): 200 फार्म।
- प्रतिदर्श का आकार (Sample Size, $n$): 50 फार्म।
प्रश्न 8: इनमें से कौन सी विधि द्वारा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, और क्यों? (क) जनगणना (ख) प्रतिदर्श
उत्तर:
प्रतिदर्श (Sample) विधि द्वारा सामान्यतः बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
कारण:
- समय व धन की बचत: इसमें कम समय और लागत लगती है।
- गहन जांच: परिगणकों की छोटी टोली होने के कारण उन्हें आसानी से प्रशिक्षित किया जा सकता है और आंकड़ों की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकता है।
- कम अप्रतिचयन त्रुटियाँ: जनगणना की तुलना में छोटी समष्टि पर त्रुटियों को नियंत्रित करना आसान होता है।
प्रश्न 9: इनमें कौन सी त्रुटि अधिक गंभीर है और क्यों? (क) प्रतिचयन त्रुटि (ख) अप्रतिचयन त्रुटि
उत्तर:
अप्रतिचयन त्रुटि (Non-sampling Error) अधिक गंभीर है।
कारण: प्रतिचयन त्रुटि को तो प्रतिदर्श का आकार (Sample size) बढ़ाकर कम किया जा सकता है, परंतु अप्रतिचयन त्रुटि (जैसे रिकॉर्डिंग में गलती, गलत माप या उत्तर न मिलना) को प्रतिदर्श बढ़ाकर भी दूर नहीं किया जा सकता। यह जनगणना में भी हो सकती है।
प्रश्न 10: मान लीजिए आपकी कक्षा में 10 छात्र हैं। इनमें से आपको तीन को चुनना है, तो इसमें कितने प्रतिदर्श संभव हैं?
उत्तर:
संभव प्रतिदर्शों की संख्या का परिकलन संचय (Combination) के सूत्र द्वारा किया जाएगा:

🎯 CBSE परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर (CBSE Important Questions)
📌 अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक वाले)
प्रश्न 1: प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: प्राथमिक आंकड़े मौलिक होते हैं और अनुसंधानकर्ता द्वारा स्वयं पहली बार एकत्र किए जाते हैं, जबकि द्वितीयक आंकड़े पहले से संगृहीत व प्रकाशित स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं।
प्रश्न 2: पायलट सर्वे (प्रायोगिक सर्वेक्षण) का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: यह मुख्य सर्वेक्षण से पहले प्रश्नावली की कमियों, समय और लागत का अनुमान लगाने में मदद करता है।
प्रश्न 3: NSSO का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: National Sample Survey Office (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय)।
📝 लघु उत्तरीय प्रश्न (3-4 अंक वाले)
प्रश्न 4: डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने की विधि के दो लाभ और दो सीमाएं लिखिए।
उत्तर:
- लाभ:
- यह विधि बहुत सस्ती होती है।
- दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँचना आसान होता है।
- सीमाएं:
- इसका प्रयोग केवल साक्षर लोगों के लिए ही किया जा सकता है।
- उत्तर न मिलने (Non-response) की दर बहुत अधिक होती है।
📑 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (6 अंक वाले)
प्रश्न 5: “एक अच्छी प्रश्नावली का निर्माण एक कला है।” एक अच्छी प्रश्नावली की मुख्य विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
- सीमित व स्पष्ट प्रश्न: प्रश्नों की संख्या कम और भाषा अत्यंत सरल होनी चाहिए।
- उपयुक्त क्रम: प्रश्नावली सामान्य प्रश्नों से शुरू होकर विशिष्ट प्रश्नों की ओर बढ़नी चाहिए।
- व्यक्तिगत व आपत्तिजनक प्रश्नों से बचाव: ऐसे प्रश्नों से बचना चाहिए जिनसे उत्तरदाता की भावनाओं को ठेस पहुँचे।
- द्वि-अर्थी व दोहरी नकारात्मकता से बचाव: प्रश्नों में दोहरे नकारात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
- उचित विकल्प: बहुविकल्पी प्रश्नों में ‘अन्य’ का विकल्प भी अवश्य होना चाहिए ताकि उत्तरदाता प्रतिबंधित महसूस न करे।