अध्याय 3: “स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि”
1. स्वास्थ्य की परिभाषा एवं आयाम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार: स्वास्थ्य “पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति है, न कि केवल रोगों या दुर्बलता की अनुपस्थिति”.
स्वास्थ्य के तीन आयाम:
शारीरिक (Physical): शरीर के सभी अंगों का सुचारु रूप से कार्य करना।
मानसिक (Mental): सकारात्मक दृष्टिकोण, शांत मन और तनाव प्रबंधन।
सामाजिक (Social): समाज, परिवार और मित्रों के साथ सामंजस्य और अच्छे संबंध।
2. लक्षण (Symptoms) और संकेत (Signs)
लक्षण: वे स्थितियाँ जिन्हें रोगी स्वयं अनुभव करता है (जैसे- दर्द, थकान, चक्कर आना)।
संकेत: वे लक्षण जिन्हें चिकित्सक या अन्य व्यक्ति देख अथवा माप सकते हैं (जैसे- बुखार/तापमान, चकत्ते, उच्च रक्तचाप)।
3. रोगों का वर्गीकरण
| आधार | संचरणीय रोग (Contagious/Communicable) | असंचरणीय रोग (Non-communicable) |
| परिभाषा | रोगाणुओं (जीवाणु, विषाणु आदि) द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। | रोगाणुओं से नहीं फैलते; जीवनशैली, आहार या पर्यावरण से संबंधित हैं। |
| उदाहरण | फ्लू, हैजा, डेंगू, टीबी, कोविड-19। | मधुमेह, कैंसर, अस्थमा, उच्च रक्तचाप। |
4. प्रतिरक्षा (Immunity) और टीकाकरण (Vaccination)
प्रतिरक्षा: शरीर की रोगों से लड़ने की प्राकृतिक या उपार्जित क्षमता।
टीका (Vaccine): मृत या क्षीणीकृत (कमजोर) रोगाणु या उनके हानिरहित भाग, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को पहचान और सुरक्षा विकसित करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं।
ऐतिहासिक तथ्य:
एडवर्ड जेनर ने चेचक (Smallpox) के प्रथम टीके की खोज की।
भारत की पारंपरिक विधि को मसूरिकाकरण (Variolation) कहा जाता था।
5. प्रतिजैविक (Antibiotics) और प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance)
प्रतिजैविक: अलेक्जेंडर फ्लेमिंग द्वारा प्रथम प्रतिजैविक पेनिसिलिन (1928) की खोज की गई। यह केवल जीवाण्विक (Bacterial) संक्रमणों पर कार्य करती है, विषाणुओं पर नहीं।
प्रतिजैविक प्रतिरोध: बिना आवश्यकता या गलत खुराक में प्रतिजैविक लेने से जीवाणु उनके प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं और दवाएँ बेअसर हो जाती हैं।
अभ्यास प्रश्नों के उत्तर (जिज्ञासा बनाए रखें)
प्रश्न 1: चित्रों में दर्शाए गए रोगों को समूहित कीजिए:
संचरणीय रोग: सर्दी-जुकाम और फ्लू, आंत्र ज्वर (टाइफॉइड), छोटी माता (चिकनपॉक्स)।
असंचरणीय रोग: मधुमेह (डायबीटीज), अस्थमा (दमा)।
प्रश्न 2: असंचरणीय रोगों को पहचानिए — (i) आंत्र ज्वर, (ii) अस्थमा, (iii) मधुमेह, (iv) खसरा
सही उत्तर: (ख) (ii) और (iii)
प्रश्न 3: विद्यालय में फ्लू का प्रकोप
(i) विद्यालय द्वारा उपाय: बीमार छात्रों को घर पर विश्राम की सलाह देना, कक्षाओं में वेंटिलेशन बढ़ाना, सतहों को सैनिटाइज करना और हाथ धोने को बढ़ावा देना।
(ii) सहपाठी से सहहानुभूतिपूर्ण व्यवहार: बिना उनका दिल दुखाए विनम्रता से मास्क पहनने का अनुरोध करना, अपनी रुमाल/सैनिटाइज़र साझा करना और शिक्षक को सूचित कर उन्हें विश्राम देने की सलाह देना।
(iii) व्यक्तिगत सुरक्षा: मास्क पहनना, बार-बार साबुन से हाथ धोना, अपना सामान (तौलिया, बोतल) साझा न करना और आँखों/चेहरे को न छूना।
प्रश्न 4: मलेरिया प्रभावित क्षेत्र की यात्रा
(i) सावधानियाँ:
यात्रा से पूर्व: चिकित्सक की सलाह पर निरोधात्मक दवाएँ लें।
यात्रा के समय: पूरी बाँह के कपड़े पहनें, मच्छर रोधी क्रीम (Repellent) और मच्छरदानी का उपयोग करें।
यात्रा के पश्चात: बुखार आने पर तुरंत रक्त की जाँच करवाएँ।
(ii) भाई-बहन को समझाना: मच्छरदानी और प्रतिकर्षी मच्छर के काटने से बचाते हैं, जिससे मलेरिया फैलाने वाला प्रोटोजोआ शरीर में प्रवेश नहीं कर पाता।
(iii) सलाह की अनदेखी करने पर: व्यक्ति मलेरिया से गंभीर रूप से ग्रस्त हो सकता है, जिससे तीव्र बुखार, ठंड लगना और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति आ सकती है।
प्रश्न 5: धूम्रपान छोड़वाना
(i) चाचाजी से संवाद: उन्हें प्यार से समझाना कि धूम्रपान से फेफड़ों के गंभीर रोग और कैंसर हो सकते हैं। उनके स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए इसे छोड़ने का अनुरोध करना।
(ii) मित्र के दबाव पर प्रतिक्रिया: दृढ़ता से “ना” कहना और समझाना कि स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
(iii) विद्यालय की भूमिका: जागरूकता अभियान चलाना, नशा-विरोधी कार्यशालाएँ आयोजित करना और परामर्शदाता (Counselor) की व्यवस्था करना।
प्रश्न 6: सानिया को गलत सिद्ध करने हेतु विनीता के प्रश्न:
“क्या प्रतिजैविक दवाएँ वायरल संक्रमण (जैसे सर्दी या फ्लू) पर काम करती हैं?”
“यदि हम बिना वजह प्रतिजैविक लेंगे, तो क्या जीवाणु उनके प्रति प्रतिरोधी नहीं हो जाएँगे?”
“क्या प्रतिजैविक से मधुमेह या कैंसर जैसे असंचरणीय रोग ठीक हो सकते हैं?”
प्रश्न 7: डेंगू डेटा विश्लेषण
(बार ग्राफ बनाने हेतु X-अक्ष पर महीनों के नाम और Y-अक्ष पर मामलों की संख्या अंकित करें)
(i) सर्वाधिक मामलों वाले 3 महीने: जुलाई (65), अगस्त (65), सितंबर (65)।
(ii) सबसे कम मामलों वाले महीने: जनवरी (10), फरवरी (12)।
(iii) कारण: इन महीनों में मानसून/वर्षा का मौसम होता है, जिससे रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
(iv) निवारक उपाय: जलजमाव को रोकना, ठहरे पानी में कीटनाशक छिड़कना, जन-जागरूकता अभियान और फॉगिंग करवाना।
प्रश्न 8: स्वास्थ्य अभियान प्रभारी के रूप में मुख्य संदेश:
संचरणीय रोगों के लिए: स्वच्छता रखें, हाथ धोएँ, खाँसते/छींकते समय मुँह ढकें और समय पर टीकाकरण करवाएँ।
असंचरणीय रोगों के लिए: संतुलित आहार लें, जंक फूड व स्क्रीन टाइम घटाएँ, रोजाना खेलें/व्यायाम करें और तंबाकू/धूम्रपान से दूर रहें।
प्रश्न 9: वायरल संक्रमण में प्रतिजैविक न लेने का कारण:
उत्तर: प्रतिजैविक दवाएँ केवल जीवाणुओं (Bacteria) की कोशिकीय संरचना पर प्रहार करती हैं। विषाणु (Virus) की संरचना अलग होती है, इसलिए प्रतिजैविक उन पर प्रभाव नहीं डालतीं। बेवजह प्रतिजैविक लेने से शरीर में जीवाण्विक प्रतिरोध बढ़ता है।
प्रश्न 10: उत्सर्जीत पदार्थ द्वारा जल संदूषण से फैलने वाले रोग:
उत्तर: यकृतशोथ (हेपेटाइटिस) ए, पोलियोमाइलाइटिस, हैजा (ये दूषित जल/भोजन से फैलते हैं)।
प्रश्न 11: दूसरी बार रोगाणु का सामना होने पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का प्रबल होना:
उत्तर: जब रोगाणु पहली बार शरीर में प्रवेश करता है, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उसकी पहचान करके “स्मृति कोशिकाएँ” (Memory Cells) बना लेती है। जब वही रोगाणु दोबारा आक्रमण करता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली उसे तुरंत पहचान लेती है और तेज़ी से शक्तिशाली प्रतिक्रिया देकर उसे नष्ट कर देती है।
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