अध्याय 2-अदृश्य सजीव संसार: हमारी नग्न आँखों से परे

अध्याय 2-अदृश्य सजीव संसार: हमारी नग्न आँखों से परे

1. अदृश्य सजीव संसार

हमारी आँखें बहुत छोटी वस्तुओं को सीधे नहीं देख सकतीं। सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के आविष्कार से बहुत छोटे जीवों को देखना संभव हुआ।

  • लेंस (Lens) छोटी वस्तुओं को बड़ा करके दिखाता है।
  • सूक्ष्मदर्शी अत्यंत छोटी वस्तुओं को कई गुना बड़ा करके दिखाता है।
  • ऐसे बहुत छोटे जीव जिन्हें हम नग्न आँखों से नहीं देख सकते, सूक्ष्मजीव (Microorganisms/Microbes) कहलाते हैं।

2. कोशिका की खोज

रॉबर्ट हुक (Robert Hooke)

  • सन् 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क की पतली परत को सूक्ष्मदर्शी से देखा।
  • उन्हें बहुत से छोटे-छोटे खाने दिखाई दिए।
  • उन्होंने इन छोटे खानों को कोशिका (Cell) नाम दिया।

एंटोनी वैन ल्यूवेनहॉक

  • उन्होंने अधिक अच्छे लेंस और सूक्ष्मदर्शी बनाए।
  • उन्होंने जीवाणुओं जैसे छोटे जीवों को स्पष्ट रूप से देखा।
  • उन्हें सूक्ष्मजीव विज्ञान का जनक (Father of Microbiology) कहा जाता है।

3. कोशिका क्या है?

कोशिका जीवन की मूल संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है।

सभी जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।

इसे इस प्रकार समझ सकते हैं:

ईंट → दीवार
कोशिका → जीव

जिस प्रकार ईंटें मिलकर दीवार बनाती हैं, उसी प्रकार कोशिकाएँ मिलकर जीव का शरीर बनाती हैं।


4. कोशिका के मुख्य भाग

एक सामान्य कोशिका के तीन मुख्य भाग होते हैं:

(क) कोशिका झिल्ली – Cell Membrane

  • यह कोशिका की बाहरी सीमा बनाती है।
  • एक कोशिका को दूसरी कोशिका से अलग करती है।
  • आवश्यक पदार्थों को अंदर आने और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर जाने देती है।

(ख) कोशिकाद्रव्य – Cytoplasm

  • यह कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच पाया जाता है।
  • इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और खनिज लवण जैसे पदार्थ पाए जाते हैं।
  • कोशिका की अधिकांश जीवन क्रियाएँ यहीं होती हैं।

(ग) केंद्रक – Nucleus

  • यह कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
  • कोशिका की वृद्धि को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है।

एक सामान्य कोशिका में कोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य और केंद्रक होते हैं। पादप, कवक और जीवाणु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति भी पाई जाती है, जबकि जीवाणुओं में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता।


5. पादप कोशिका – Plant Cell

पादप कोशिका में सामान्यतः पाए जाते हैं:

  • कोशिका भित्ति
  • कोशिका झिल्ली
  • कोशिकाद्रव्य
  • केंद्रक
  • हरितलवक
  • बड़ी रिक्तिका

कोशिका भित्ति – Cell Wall

यह पादप कोशिका को:

  • मजबूती
  • दृढ़ता
  • आकार और सहारा प्रदान करती है।

हरितलवक – Chloroplast

  • इसमें हरा वर्णक क्लोरोफिल (Chlorophyll) पाया जाता है।
  • यह पौधों को प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाने में सहायता करता है।

रिक्तिका – Vacuole

यह:

  • विभिन्न पदार्थों को संग्रहित करती है।
  • अपशिष्ट पदार्थों के भंडारण में मदद करती है।
  • कोशिका का आकार बनाए रखने में सहायता करती है।

6. जंतु कोशिका – Animal Cell

जंतु कोशिका में मुख्य रूप से:

  • कोशिका झिल्ली
  • कोशिकाद्रव्य
  • केंद्रक

पाए जाते हैं।

जंतु कोशिका में:

  • कोशिका भित्ति नहीं होती।
  • हरितलवक नहीं होते।
  • रिक्तिकाएँ सामान्यतः बहुत छोटी होती हैं या अनुपस्थित हो सकती हैं।

7. पादप कोशिका और जंतु कोशिका में अंतर

पादप कोशिकाजंतु कोशिका
कोशिका भित्ति होती है।कोशिका भित्ति नहीं होती।
हरितलवक पाए जा सकते हैं।हरितलवक नहीं होते।
सामान्यतः बड़ी रिक्तिका होती है।रिक्तिका छोटी या अनुपस्थित हो सकती है।
आकार अधिक नियमित होता है।आकार अलग-अलग हो सकता है।

8. कोशिकाओं के आकार में भिन्नता

सभी कोशिकाओं का आकार एक जैसा नहीं होता।

उनका आकार उनके कार्य के अनुसार होता है।

तंत्रिका कोशिका – Nerve Cell

  • बहुत लंबी और शाखायुक्त होती है।
  • शरीर के विभिन्न भागों तक संदेश पहुँचाती है।

पेशी कोशिका – Muscle Cell

  • पतली, लचीली और धुरी के आकार की होती है।
  • सिकुड़कर और फैलकर गति में सहायता करती है।

गाल की कोशिकाएँ – Cheek Cells

  • पतली और चपटी होती हैं।
  • मुँह के अंदर सुरक्षा परत बनाती हैं।

महत्वपूर्ण: कोशिका का आकार और संरचना उसके कार्य से संबंधित होती है।


9. शरीर में संगठन के स्तर

जीवों के शरीर का संगठन इस क्रम में होता है:

कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव

उदाहरण:

पेशी कोशिका → पेशी ऊतक → आमाशय → पाचन तंत्र → मनुष्य

  • समान कोशिकाएँ मिलकर ऊतक (Tissue) बनाती हैं।
  • विभिन्न ऊतक मिलकर अंग (Organ) बनाते हैं।
  • कई अंग मिलकर अंग तंत्र (Organ System) बनाते हैं।
  • सभी अंग तंत्र मिलकर एक पूरा जीव (Organism) बनाते हैं।

10. एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीव

एककोशिकीय जीव – Unicellular Organisms

ऐसे जीव जिनका शरीर केवल एक कोशिका से बना होता है।

उदाहरण:

  • जीवाणु
  • अमीबा
  • पैरामीशियम
  • यीस्ट

इनमें एक ही कोशिका जीवन की सभी आवश्यक क्रियाएँ करती है।

बहुकोशिकीय जीव – Multicellular Organisms

ऐसे जीव जिनका शरीर अनेक कोशिकाओं से बना होता है।

उदाहरण:

  • मनुष्य
  • अन्य जंतु
  • पौधे
  • कुछ कवक

11. सूक्ष्मजीव क्या हैं?

ऐसे अत्यंत छोटे जीव जिन्हें सामान्यतः नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता, सूक्ष्मजीव कहलाते हैं।

सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं:

  • जल में
  • मिट्टी में
  • वायु में
  • भोजन में
  • पौधों और जंतुओं में
  • हमारे शरीर के अंदर
  • अत्यधिक गर्म या ठंडे स्थानों में भी

कुछ सूक्ष्मजीव एककोशिकीय और कुछ बहुकोशिकीय होते हैं।

मुख्य प्रकार:

  1. जीवाणु – Bacteria
  2. कवक – Fungi
  3. प्रोटोजोआ – Protozoa
  4. शैवाल – Algae

12. सूक्ष्मजीवों के उदाहरण

अमीबा

  • एक प्रोटोजोआ है।
  • एककोशिकीय है।
  • इसका आकार अनियमित होता है।

पैरामीशियम

  • एककोशिकीय प्रोटोजोआ है।
  • विशेष संरचनाओं की सहायता से गति करता है।

शैवाल

कुछ शैवालों में क्लोरोफिल होता है, जिससे वे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बना सकते हैं।

कवक

उदाहरण:

  • यीस्ट
  • ब्रेड मोल्ड

जीवाणु

जीवाणु कई आकारों के हो सकते हैं:

  • गोलाकार
  • छड़ के आकार के
  • सर्पिल
  • अल्पविराम के आकार के

13. वायरस – Viruses

वायरस:

  • अत्यंत सूक्ष्म होते हैं।
  • अकोशिकीय (Acellular) होते हैं।
  • केवल जीवित कोशिका के अंदर ही अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
  • पौधों, जंतुओं तथा जीवाणुओं को संक्रमित कर सकते हैं।

 


14. पर्यावरण की सफाई में सूक्ष्मजीव

जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव:

  • मृत पौधों
  • मृत जंतुओं
  • पत्तियों
  • जैविक कचरे

को सरल पदार्थों में तोड़ देते हैं।

इस प्रक्रिया को अपघटन (Decomposition) कहते हैं।

प्रक्रिया:

मृत पदार्थ/कचरा → सूक्ष्मजीव → सरल पदार्थ → पोषक तत्व मिट्टी में वापस

इससे:

  • पर्यावरण साफ होता है।
  • पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है।
  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
  • खाद बनती है।

 


15. सूक्ष्मजीव और बायोगैस

कुछ जीवाणु ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पौधों और जंतुओं के अपशिष्ट को विघटित करते हैं।

इससे बायोगैस बनती है।

इसमें मुख्य रूप से:

  • मीथेन
  • कार्बन डाइऑक्साइड

जैसी गैसें होती हैं।

बायोगैस का उपयोग:

  • खाना पकाने
  • गर्म करने
  • बिजली बनाने
  • वाहनों को चलाने

में किया जा सकता है।


16. भोजन बनाने में यीस्ट का उपयोग

यीस्ट एक प्रकार का कवक है।

यीस्ट शर्करा को तोड़ता है और:

  • कार्बन डाइऑक्साइड
  • थोड़ी मात्रा में अल्कोहल

उत्पन्न करता है।

कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले आटे को:

  • फुलाते हैं।
  • मुलायम बनाते हैं।
  • हल्का और स्पंजी बनाते हैं।

इसलिए यीस्ट का उपयोग:

  • ब्रेड
  • केक
  • पेस्ट्री
  • भटूरे आदि

बनाने में किया जाता है।


17. लैक्टोबैसिलस और दही

Lactobacillus (लैक्टोबैसिलस) एक उपयोगी जीवाणु है।

यह:

  • दूध से दही बनाने में सहायता करता है।
  • भोजन के किण्वन में सहायता करता है।

उपयुक्त गर्म तापमान दही जमने के लिए सहायक होता है।


18. नाइट्रोजन स्थिरीकरण

कुछ उपयोगी सूक्ष्मजीव दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में रहते हैं।

उदाहरण:

  • मटर
  • सेम
  • मसूर

ये सूक्ष्मजीव वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपयोगी रूप में उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

इससे:

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
  • दलहनी फसलों को कम नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता पड़ सकती है।

 


19. जीवाणु कोशिका

जीवाणु कोशिका में:

  • कोशिका भित्ति
  • कोशिका झिल्ली
  • कोशिकाद्रव्य
  • न्यूक्लिऑइड

पाया जाता है।

जीवाणु में झिल्ली से घिरा स्पष्ट केंद्रक नहीं होता। इसके स्थान पर आनुवंशिक पदार्थ वाला क्षेत्र न्यूक्लिऑइड (Nucleoid) कहलाता है।


⭐ एक नज़र में याद करें

कोशिका → जीवन की मूल इकाई
केंद्रक → कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है
कोशिका झिल्ली → पदार्थों के अंदर-बाहर जाने को नियंत्रित करती है
कोशिकाद्रव्य → अधिकांश जीवन क्रियाओं का स्थान
कोशिका भित्ति → मजबूती और सहारा
हरितलवक → प्रकाश संश्लेषण
रिक्तिका → पदार्थों का संग्रह और आकार बनाए रखना
सूक्ष्मजीव → बहुत छोटे जीव
यीस्ट → किण्वन में उपयोगी कवक
लैक्टोबैसिलस → दही बनाने में सहायक
अपघटन → मृत पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ना
न्यूक्लिऑइड → जीवाणु का आनुवंशिक पदार्थ वाला क्षेत्र


भाग B – पुस्तक के पीछे दिए गए अभ्यास प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. कोशिका के दिए गए भागों को सही स्थान पर लिखिए।

दिए गए भाग: केंद्रक, कोशिकाद्रव्य, हरितलवक, कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, न्यूक्लिऑइड।

उत्तर:

तीनों कोशिकाओं में सामान्य:

  • कोशिका झिल्ली
  • कोशिकाद्रव्य

केवल पादप कोशिका में:

  • हरितलवक

केवल जीवाणु कोशिका में:

  • न्यूक्लिऑइड

पादप और जीवाणु कोशिका में:

  • कोशिका भित्ति

पादप और जंतु कोशिका में:

  • केंद्रक

जीवाणु में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता, बल्कि न्यूक्लिऑइड होता है।


प्रश्न 2.

आनंदी ने दो परखनलियाँ A और B लीं। दोनों में चीनी का घोल डाला और केवल B में यीस्ट मिलाया। दोनों के मुँह पर गुब्बारे लगाए।

(i) 3–4 घंटे बाद B का गुब्बारा क्यों फूल गया?

उत्तर:

सही विकल्प है:

(c) यीस्ट ने परखनली B में गैस उत्पन्न की जिससे गुब्बारा फूल गया।

यीस्ट चीनी का किण्वन करता है और कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है।

यह गैस गुब्बारे में भर जाती है, जिससे गुब्बारा फूल जाता है।


(ii) गुब्बारे की गैस को चूने के पानी में डालने का उद्देश्य क्या था?

उत्तर:

आनंदी यह पता लगाना चाहती थी कि यीस्ट द्वारा उत्पन्न गैस कार्बन डाइऑक्साइड है या नहीं।

कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

इसलिए चूने के पानी का दूधिया होना कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति दर्शाता है।


प्रश्न 3.

गेहूँ उगाने वाला किसान नाइट्रोजन युक्त उर्वरक डालता है, लेकिन सेम उगाने वाली किसान बिना नाइट्रोजन उर्वरक के भी स्वस्थ फसल प्राप्त कर सकती है। क्यों?

उत्तर:

गेहूँ के पौधे स्वयं वायुमंडलीय नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक डालना पड़ सकता है।

लेकिन सेम एक दलहनी पौधा है।

इसकी जड़ों की ग्रंथियों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले उपयोगी सूक्ष्मजीव रहते हैं।

ये वायुमंडल की नाइट्रोजन को पौधे के लिए उपयोगी बनाते हैं।

इसलिए सेम की फसल को बाहरी नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता कम पड़ सकती है।


प्रश्न 4.

स्नेहल ने दो गड्ढे A और B बनाए। A में फल-सब्जियों के छिलकों के साथ सूखी पत्तियाँ मिलाईं, जबकि B में बिना सूखी पत्तियों के वही कचरा डाला। वह क्या जाँचना चाहती है?

उत्तर:

स्नेहल यह जाँचना चाहती है कि सूखी पत्तियाँ मिलाने से जैविक कचरे के अपघटन और खाद बनने की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है।

वह तीन सप्ताह बाद दोनों गड्ढों में अपघटन की तुलना कर सकती है।

जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव पौधों के कचरे को तोड़कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद बनाने में सहायता करते हैं।


प्रश्न 5. निम्न सूक्ष्मजीवों की पहचान कीजिए।

(i) मैं हर प्रकार के वातावरण में तथा आपकी आँतों में भी रहता हूँ।

उत्तर: जीवाणु (Bacteria)

कुछ उपयोगी जीवाणु हमारी आँतों में रहते हैं और पाचन में सहायता करते हैं।

(ii) मैं ब्रेड और केक को मुलायम और फूला हुआ बनाता हूँ।

उत्तर: यीस्ट (Yeast)

यीस्ट किण्वन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है, जिससे आटा फूलता है।

(iii) मैं दलहनी फसलों की जड़ों में रहता हूँ और उनकी वृद्धि के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता हूँ।

उत्तर: नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु।

ये दलहनी पौधों की जड़ों की ग्रंथियों में पाए जाते हैं।

 


प्रश्न 6.

यह सिद्ध करने के लिए प्रयोग बनाइए कि सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए उपयुक्त तापमान, वायु और नमी आवश्यक हैं।

उत्तर:

चार समान ब्रेड के टुकड़े लें।

  • ब्रेड A: नम करके सामान्य गर्म स्थान पर खुला रखें।
  • ब्रेड B: नम करके फ्रिज में रखें।
  • ब्रेड C: सूखा रखकर सामान्य तापमान पर रखें।
  • ब्रेड D: उपयुक्त नमी और तापमान रखें लेकिन हवा की उपलब्धता सीमित रखें।

कुछ दिनों तक निरीक्षण करें।

अवलोकन:

उपयुक्त तापमान, नमी और अनुकूल परिस्थितियों वाली ब्रेड पर सूक्ष्मजीव/फफूँद तेजी से बढ़ेंगे।

निष्कर्ष:

सूक्ष्मजीवों की अच्छी वृद्धि के लिए उपयुक्त तापमान और नमी जैसी अनुकूल परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं। अलग-अलग सूक्ष्मजीवों की वायु संबंधी आवश्यकताएँ अलग हो सकती हैं।


प्रश्न 7.

ब्रेड का एक टुकड़ा सिंक के पास और दूसरा फ्रिज में रखें। तीन दिन बाद तुलना कीजिए और कारण बताइए।

उत्तर:

सिंक के पास रखी ब्रेड:

उस पर अधिक फफूँद या सूक्ष्मजीवों की वृद्धि दिखाई दे सकती है।

फ्रिज में रखी ब्रेड:

उस पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि बहुत कम या धीमी होगी।

कारण:

सिंक के पास सामान्यतः अधिक नमी और अपेक्षाकृत गर्म वातावरण मिलता है, जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए अनुकूल होता है।

फ्रिज का कम तापमान सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को धीमा कर देता है।


प्रश्न 8.

एक विद्यार्थी देखता है कि दही को एक दिन बाहर रखने पर वह अधिक खट्टा हो जाता है। इसके दो संभावित कारण बताइए।

उत्तर:

पहला कारण:
दही में मौजूद लैक्टोबैसिलस जीवाणु लगातार सक्रिय रहते हैं और अधिक अम्ल बनाते हैं, जिससे दही अधिक खट्टा हो जाता है।

दूसरा कारण:
बाहर का अपेक्षाकृत गर्म तापमान जीवाणुओं की गतिविधि और वृद्धि के लिए अधिक अनुकूल होता है। इसलिए दही फ्रिज की तुलना में बाहर जल्दी खट्टा होता है।

लैक्टोबैसिलस दही बनाने और खाद्य किण्वन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


प्रश्न 9.

चित्र 2.15 में फ्लास्क A में गर्म चीनी का घोल + यीस्ट है तथा यह चूने के पानी वाली परखनली B से जुड़ा है।

(i) फ्लास्क A के चीनी के घोल में क्या होता है?

उत्तर:

यीस्ट चीनी का किण्वन करता है।

इस प्रक्रिया में:

  • कार्बन डाइऑक्साइड गैस
  • थोड़ी मात्रा में अल्कोहल

उत्पन्न होते हैं।


(ii) चार घंटे बाद परखनली B में क्या दिखाई देगा? ऐसा क्यों हुआ?

उत्तर:

परखनली B में उपस्थित चूने का पानी दूधिया हो जाएगा।

कारण:

फ्लास्क A में यीस्ट चीनी का किण्वन करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न करता है।

यह गैस नली द्वारा चूने के पानी में पहुँचती है और उसे दूधिया कर देती है।

इससे कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति की पुष्टि होती है।


(iii) यदि फ्लास्क A में यीस्ट न डाला जाए तो क्या होगा?

उत्तर:

यदि यीस्ट नहीं डाला जाए तो:

  • यीस्ट द्वारा किण्वन नहीं होगा।
  • यीस्ट द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न नहीं होगी।
  • इसलिए चूने का पानी यीस्ट किण्वन के कारण दूधिया नहीं होगा।

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