Ixth class क्षितिज (भाग–1)

क्षितिज (भाग–1) :


🟢 गद्य खंड (Prose Section)


1. दो बैलों की कथा — प्रेमचंद

यह कहानी दो बैलों हीरा और मोती के माध्यम से स्वतंत्रता, स्वाभिमान और मित्रता का संदेश देती है। झूरी इन दोनों बैलों से बहुत प्रेम करता है और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह रखता है। लेकिन उसका साला गया उन्हें अपने घर ले जाता है, जहाँ उनसे बहुत कठोर काम लिया जाता है और उन्हें ठीक से चारा भी नहीं मिलता। वहाँ उनके साथ जानवरों जैसा नहीं बल्कि गुलामों जैसा व्यवहार होता है।

अपमान और अत्याचार सह न पाने पर दोनों बैल वहाँ से भागकर झूरी के पास लौट आते हैं। लेकिन उन्हें फिर पकड़ लिया जाता है और कांजीहौस (जानवरों की जेल) में बंद कर दिया जाता है। वहाँ वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरे जानवरों की आज़ादी के लिए भी दीवार तोड़ देते हैं और सबको बाहर निकाल देते हैं। अंत में वे एक कसाई के चंगुल से बचकर अपने असली मालिक झूरी के पास पहुँच जाते हैं।

भावार्थ: यह कहानी बताती है कि स्वतंत्रता सबसे कीमती चीज़ है, और उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। साथ ही यह पशु–मानव प्रेम, मित्रता और आत्मसम्मान का सुंदर उदाहरण है।


2. ल्हासा की ओर — राहुल सांकृत्यायन

यह एक यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें लेखक अपनी तिब्बत यात्रा का वर्णन करते हैं। वे 1929–30 में नेपाल के रास्ते तिब्बत गए थे। रास्ता बहुत कठिन और खतरनाक था—ऊँचे पहाड़, बर्फ, संकरे रास्ते और डाकुओं का डर हमेशा बना रहता था।

लेखक बताते हैं कि तिब्बत का समाज भारत से अलग था। वहाँ न पर्दा प्रथा थी, न छुआछूत। वहाँ की ज़मीन जागीरदारों में बँटी थी और आम लोग उनके अधीन काम करते थे। वे डाँडा थोङ्ला जैसे खतरनाक दर्रों का वर्णन करते हैं। साथ ही वे बौद्ध भिक्षु सुमति के बारे में बताते हैं, जिसे लोग बहुत सम्मान देते थे।

भावार्थ: यह पाठ हमें तिब्बत के जीवन, संस्कृति और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित कराता है और लेखक के साहस और जिज्ञासा को दिखाता है।


3. उपभोक्तावाद की संस्कृति — श्यामाचरण दुबे

यह निबंध आधुनिक समाज की मानसिकता पर गहरी चोट करता है। लेखक कहते हैं कि आज का इंसान विज्ञापनों के प्रभाव में आकर ज़रूरत से ज़्यादा चीज़ें खरीद रहा है। हम गुणवत्ता से ज़्यादा ब्रांड और दिखावे को महत्व देने लगे हैं।

टूथपेस्ट, साबुन, कपड़े, मोबाइल—हर चीज़ में हम फैशन और स्टेटस देखने लगे हैं। इससे हमारी सोच बदल गई है। रिश्तों में अपनापन कम हो रहा है और स्वार्थ बढ़ रहा है। लेखक चेतावनी देते हैं कि अगर यही चलता रहा, तो हमारी संस्कृति और मानवीय मूल्य नष्ट हो जाएँगे

भावार्थ: यह पाठ उपभोक्तावादी सोच से सावधान करता है और सादा, संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।


4. साँवले सपनों की याद — जाबिर हुसैन

यह पाठ प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी डॉ. सालिम अली के व्यक्तित्व पर आधारित है। लेखक ने उनकी मृत्यु के बाद यह संस्मरण लिखा। सालिम अली को पक्षियों से बहुत प्रेम था और वे जीवन भर प्रकृति की रक्षा के लिए काम करते रहे।

उन्होंने साइलेंट वैली को पर्यावरण विनाश से बचाने के लिए प्रधानमंत्री से भी अनुरोध किया था। वे सादगी से रहते थे, लेकिन उनका काम बहुत महान था। लेखक उन्हें “साँवले सपनों का हमसफर” कहते हैं, यानी वे प्रकृति और भविष्य की रक्षा के सपने देखने वाले इंसान थे।

भावार्थ: यह पाठ हमें प्रकृति प्रेम, पर्यावरण संरक्षण और समर्पण का महत्व सिखाता है।


5. नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया — चपला देवी

यह पाठ 1857 की क्रांति के समय के एक हृदयविदारक प्रसंग पर आधारित है। नाना साहब जब अंग्रेजों से बचने के लिए बिठूर छोड़कर भागे, तो वे अपनी छोटी बेटी मैना को साथ नहीं ले जा सके।

अंग्रेज जनरल आउटरम ने नाना साहब का महल तोड़ दिया और निर्दोष बालिका मैना को भी आग में जला दिया गया। छोटी उम्र में भी मैना ने डर नहीं दिखाया और साहस से मृत्यु को स्वीकार किया।

भावार्थ: यह पाठ बलिदान, देशभक्ति और अंग्रेजों की क्रूरता को दिखाता है और हमें स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की याद दिलाता है।


6. प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई

यह एक व्यंग्य लेख है। लेखक प्रेमचंद की एक फोटो देखते हैं जिसमें उनके जूते फटे हुए हैं। वे कहते हैं कि यह फटा जूता प्रेमचंद की सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है।

लेखक उन लोगों पर तंज कसते हैं जो फोटो खिंचवाने के लिए उधार के कपड़े या चीज़ें पहनते हैं, सिर्फ दिखावे के लिए। प्रेमचंद दिखावे में नहीं, सच्चाई और संघर्ष में विश्वास रखते थे।

भावार्थ: यह पाठ दिखावे की संस्कृति पर व्यंग्य करता है और सच्चे जीवन मूल्यों की प्रशंसा करता है।


7. मेरे बचपन के दिन — महादेवी वर्मा

यह एक संस्मरण है जिसमें लेखिका अपने बचपन की बातें बताती हैं। उस समय समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता था, लेकिन उनके बाबा ने उन्हें पढ़ाया-लिखाया और आगे बढ़ने का मौका दिया।

वे अपनी सहेली सुभद्रा कुमारी चौहान और मुस्लिम परिवार से अपने अच्छे संबंधों का भी ज़िक्र करती हैं। इससे उस समय के साम्प्रदायिक सद्भाव का पता चलता है।

भावार्थ: यह पाठ नारी शिक्षा, समानता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है।


8. एक कुत्ता और एक मैना — हजारी प्रसाद द्विवेदी

इस निबंध में लेखक शांतिनिकेतन के अनुभव बताते हैं। एक कुत्ता अपने मालिक से बहुत प्रेम करता है और उसकी मृत्यु के बाद भी दुख मनाता है। इससे पता चलता है कि जानवरों में भी भावनाएँ होती हैं।

दूसरी ओर, एक लंगड़ी मैना के माध्यम से लेखक पक्षियों की पीड़ा और संवेदनशीलता दिखाते हैं।

भावार्थ: यह पाठ हमें जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और संवेदना रखना सिखाता है।


🔵 काव्य खंड (Poetry Section)


9. साखियाँ एवं सबद — कबीर

कबीर अपनी साखियों में कहते हैं कि सच्चा ज्ञान और भक्ति अंदर से आती है। भगवान मंदिर, मस्जिद या तीर्थ में नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय में रहते हैं। वे आडंबर, पाखंड और दिखावे का विरोध करते हैं।

भाव: सच्ची भक्ति = आत्मज्ञान + प्रेम + सच्चाई


10. वाख — ललद्यद

ललद्यद कहती हैं कि ईश्वर से मिलने के लिए बाहरी कर्मकांड बेकार हैं। न योग, न तप—अगर अहंकार नहीं छोड़ा, तो कुछ नहीं मिलेगा। सच्चा मार्ग है आत्मज्ञान और विनम्रता

भाव: ईश्वर की प्राप्ति भीतर से होती है, बाहर से नहीं।


11. सवैये — रसखान

रसखान मुस्लिम होकर भी कृष्ण के महान भक्त थे। वे कहते हैं कि अगर जन्म मिले तो ब्रज में मिले, अगर पत्थर बनें तो गोवर्धन का बनें। वे कृष्ण के प्रेम पर तीनों लोक न्योछावर करने को तैयार हैं।

भाव: सच्ची भक्ति जाति–धर्म से ऊपर होती है।


12. कैदी और कोकिला — माखनलाल चतुर्वेदी

जेल में बंद कवि को कोयल की आवाज़ बेचैन कर देती है। कोयल की कूक उन्हें स्वतंत्रता की याद दिलाती है। यह कविता अंग्रेजी शासन के अत्याचार और देशभक्तों की पीड़ा दिखाती है।

भाव: स्वतंत्रता की तड़प और संघर्ष की आग।


13. ग्राम श्री — सुमित्रानंदन पंत

यह कविता गाँव की सुंदरता और प्रकृति का उत्सव है। खेत, फसलें, फूल, आम की मंजरियाँ—सब मिलकर गाँव को मरकत डिब्बे जैसा बना देते हैं।

भाव: प्रकृति और ग्रामीण जीवन की सुंदरता।


14. चंद्र गहना से लौटती बेर — केदारनाथ अग्रवाल

कवि खेत की मेड़ पर बैठकर प्रकृति को मानवीय रूप में देखते हैं। चना दूल्हा है, अलसी नायिका है। पूरी कविता में प्रकृति जीवंत हो उठती है।

भाव: प्रकृति और मानव जीवन का गहरा संबंध।


15. मेघ आए — सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

बादलों का आना गाँव में दामाद के आने जैसा है। हवा चलती है, पेड़ झुकते हैं, वातावरण बदल जाता है। सब जगह उत्सव का माहौल बन जाता है।

भाव: वर्षा का स्वागत और प्रकृति का उल्लास।


16. यमराज की दिशा — चंद्रकांत देवताले

पहले कहा जाता था कि दक्षिण दिशा में पैर करके मत सोओ, वहाँ यमराज रहते हैं। लेकिन कवि कहता है कि आज तो हर दिशा में यमराज हैं—हर ओर शोषण, हिंसा और मौत फैली है।

भाव: आधुनिक समाज की क्रूर सच्चाई पर तीखा व्यंग्य।


17. बच्चे काम पर जा रहे हैं — राजेश जोशी

सुबह-सुबह बच्चों को काम पर जाते देख कवि डर जाता है। बच्चे तो खेलने, पढ़ने के लिए होते हैं, काम करने के लिए नहीं। यह बचपन की हत्या है।

भाव: बाल मजदूरी के खिलाफ गहरी पीड़ा और विरोध।


समझ गया 👍 आप चाहते हैं कि “क्षितिज (भाग–1)” के सभी अध्यायों के महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर एक जगह, अध्याय-वार (chapter wise) combined मिल जाएँ — ताकि पढ़ते समय सब कुछ एक साथ मिल जाए।

नीचे मैंने पूरा सेट, साफ और परीक्षा-उपयोगी फॉर्मेट में अध्याय-वार जोड़ दिया है:


अध्याय-वार महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर —


🟢 गद्य खंड (Prose Section)


1. दो बैलों की कथा — प्रेमचंद

प्रश्न 1: किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?
उत्तर:

  • दोनों बैल हल में साथ जोते जाते थे और एक-दूसरे पर बोझ नहीं डालना चाहते थे।
  • गया के घर से भागते समय दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।
  • सांड से लड़ते समय दोनों ने मिलकर योजना से प्रहार किया।
  • कांजीहौस में मोती भाग सकता था, फिर भी वह बँधे हुए हीरा को छोड़कर नहीं गया।

प्रश्न 2: कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यह कहानी स्वतंत्रता, मित्रता और आत्मसम्मान का महत्व बताती है और सिखाती है कि आज़ादी बिना संघर्ष के नहीं मिलती


2. ल्हासा की ओर — राहुल सांकृत्यायन

प्रश्न 1: तिब्बती समाज में यात्रियों के लिए क्या अच्छी और बुरी बातें थीं?
उत्तर:
अच्छी बातें: वहाँ छुआछूत, जाति-पाँति और पर्दा प्रथा नहीं थी। लोग अनजान यात्रियों को भी चाय बनाने की अनुमति दे देते थे।
बुरी बातें: कानून-व्यवस्था कमजोर थी। निर्जन स्थानों पर डाकुओं का डर रहता था और पुलिस की व्यवस्था नहीं थी।

प्रश्न 2: लेखक की यात्रा किन कठिनाइयों से भरी थी?
उत्तर: ऊँचे पहाड़, बर्फीले रास्ते, संकरे दर्रे और डाकुओं का डर—ये सब यात्रा को कठिन बनाते थे।


3. उपभोक्तावाद की संस्कृति — श्यामाचरण दुबे

प्रश्न 1: लेखक के अनुसार ‘दिखावे की संस्कृति’ समाज के लिए क्यों हानिकारक है?
उत्तर: इससे संसाधनों का अपव्यय होता है, सामाजिक दूरी और ईर्ष्या बढ़ती है, संस्कृति कमजोर होती है और हम विज्ञापनों के गुलाम बन जाते हैं।

प्रश्न 2: लेखक क्या चेतावनी देता है?
उत्तर: अगर यही प्रवृत्ति चली तो मानवीय मूल्य और सांस्कृतिक पहचान नष्ट हो जाएँगे।


4. साँवले सपनों की याद — जाबिर हुसैन

प्रश्न: सालिम अली का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर: वे प्रकृति प्रेमी, पक्षियों के रक्षक और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित व्यक्ति थे। उन्होंने ‘साइलेंट वैली’ को बचाने का प्रयास किया।


5. नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया — चपला देवी

प्रश्न: देवी मैना का बलिदान हमें क्या संदेश देता है?
उत्तर: यह देशभक्ति, साहस और त्याग का संदेश देता है और अंग्रेजों की क्रूरता को उजागर करता है।


6. प्रेमचंद के फटे जूते — हरिशंकर परसाई

प्रश्न: ‘जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है’—इसका आशय क्या है?
उत्तर: यहाँ टोपी = मान-सम्मान, जूता = शक्ति/धन का प्रतीक है। समाज में अक्सर धन और शक्ति को ज्ञान और मूल्य से ऊपर रखा जाता है—यह व्यंग्य इसी पर है।


7. मेरे बचपन के दिन — महादेवी वर्मा

प्रश्न: लेखिका का बचपन समाज की कौन-सी सच्चाई दिखाता है?
उत्तर: उस समय लड़कियों को बोझ समझा जाता था, लेकिन उनके बाबा ने उन्हें पढ़ाया। यह नारी शिक्षा और साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश देता है।


8. एक कुत्ता और एक मैना — हजारी प्रसाद द्विवेदी

प्रश्न: लेखक क्या सिद्ध करना चाहता है?
उत्तर: कि पशु-पक्षियों में भी भावनाएँ और संवेदनाएँ होती हैं और हमें उनके प्रति करुणा रखनी चाहिए।


🔵 काव्य खंड (Poetry Section)


9. साखियाँ एवं सबद — कबीर

प्रश्न: कबीर के अनुसार सच्ची भक्ति क्या है?
उत्तर: सच्ची भक्ति आडंबर छोड़कर, आत्मज्ञान, प्रेम और सच्चाई से ईश्वर को पाने में है। ईश्वर मनुष्य के हृदय में रहते हैं।


10. वाख — ललद्यद

प्रश्न: ललद्यद बाहरी कर्मकांड का विरोध क्यों करती हैं?
उत्तर: क्योंकि ईश्वर अहंकार त्याग और आत्मज्ञान से मिलते हैं, न कि हठयोग और दिखावे से।


11. सवैये — रसखान

प्रश्न: रसखान अगले जन्म में भी ब्रज में ही क्यों रहना चाहते हैं?
उत्तर: क्योंकि वे कृष्ण के अनन्य भक्त हैं और मानते हैं कि ब्रज के कण-कण में कृष्ण का वास है।


12. कैदी और कोकिला — माखनलाल चतुर्वेदी

प्रश्न: कवि ने कोयल के बोल को ‘चीख’ क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि देश की गुलामी और अत्याचार देखकर कोयल की आवाज़ मधुर न होकर वेदना की पुकार बन गई है।


13. ग्राम श्री — सुमित्रानंदन पंत

प्रश्न: कविता में गाँव की सुंदरता कैसे दिखाई गई है?
उत्तर: खेत, फसल, फूल और आम की मंजरियों से गाँव को रत्नों से भरे मरकत डिब्बे जैसा बताया गया है।


14. चंद्र गहना से लौटती बेर — केदारनाथ अग्रवाल

प्रश्न: कविता में प्रकृति का मानवीकरण कैसे हुआ है?
उत्तर: चने को दूल्हा और अलसी को नायिका बताकर प्रकृति को मानव रूप दिया गया है।


15. मेघ आए — सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

प्रश्न: बादलों की तुलना दामाद से क्यों की गई है?
उत्तर: जैसे दामाद के आने पर उत्सव होता है, वैसे ही बादलों के आने से प्रकृति में उल्लास छा जाता है।


16. यमराज की दिशा — चंद्रकांत देवताले

प्रश्न: “आज हर दिशा में यमराज हैं”—इसका अर्थ क्या है?
उत्तर: आज समाज में हर ओर हिंसा, शोषण और विनाश फैला हुआ है।


17. बच्चे काम पर जा रहे हैं — राजेश जोशी

प्रश्न: कवि इसे ‘बड़ा हादसा’ क्यों मानता है?
उत्तर: क्योंकि बच्चों से बचपन, शिक्षा और खुशियाँ छिन रही हैं, जो समाज और देश के भविष्य के लिए बहुत बड़ी क्षति है।


 

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