CBSE कक्षा 10वीं गणित: सभी अध्यायों के महत्वपूर्ण सूत्र (त्वरित पुनरावृति के लिए)
यह सभी महत्वपूर्ण सूत्र आपको परीक्षा से पहले जल्दी से दोहराने में मदद करेंगे!
अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका: a = bq + r, जहाँ 0 ≤ r < b
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक अद्वितीय गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
दो संख्याओं का LCM और HCF: LCM (a, b) × HCF (a, b) = a × b
अध्याय 2: बहुपद (Polynomials)
रैखिक बहुपद (एक चर वाला): ax + b
शून्यक: -b/a
द्विघात बहुपद: ax² + bx + c
शून्यकों का योग (α + β): -b/a
शून्यकों का गुणनफल (αβ): c/a
बहुपद बनाने का सूत्र: k[x² – (α + β)x + αβ]
त्रिघात बहुपद: ax³ + bx² + cx + d
शून्यकों का योग (α + β + γ): -b/a
शून्यकों के युग्मों के गुणनफलों का योग (αβ + βγ + γα): c/a
शून्यकों का गुणनफल (αβγ): -d/a
अध्याय 3: दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म (Pair of Linear Equations in Two Variables)
दो रैखिक समीकरण: a₁x + b₁y + c₁ = 0 और a₂x + b₂y + c₂ = 0
| तुलना | ग्राफीय निरूपण | बीजगणितीय निरूपण |
| a₁/a₂ ≠ b₁/b₂ | प्रतिच्छेदी रेखाएँ | अद्वितीय हल |
| a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂ | संपाती रेखाएँ | अपरिमित रूप से अनेक हल |
| a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂ | समांतर रेखाएँ | कोई हल नहीं |
अध्याय 4: द्विघात समीकरण (Quadratic Equations)
मानक रूप: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0
द्विघात सूत्र: x = [-b ± √(b² – 4ac)] / 2a
विभक्तिकर (Discriminant): D = b² – 4ac
D > 0: दो भिन्न वास्तविक मूल
D = 0: दो बराबर वास्तविक मूल
D < 0: कोई वास्तविक मूल नहीं
अध्याय 5: समांतर श्रेढ़ियाँ (Arithmetic Progressions – AP)
nवाँ पद (an): an = a + (n-1)d
जहाँ a = पहला पद, d = सार्व अंतर
पहले n पदों का योग (Sn):
Sn = n/2 [2a + (n-1)d]
Sn = n/2 (a + l), जहाँ l = अंतिम पद
अध्याय 6: त्रिभुज (Triangles)
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (थेल्स प्रमेय): यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा के समांतर अन्य दो भुजाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करने के लिए एक रेखा खींची जाए, तो ये अन्य दो भुजाएँ एक ही अनुपात में विभाजित हो जाती हैं।
समान त्रिभुजों के लिए मानदंड:
AAA (कोण-कोण-कोण) समरूपता
SSS (भुजा-भुजा-भुजा) समरूपता
SAS (भुजा-कोण-भुजा) समरूपता
समान त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात: दो समान त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात उनकी संगत भुजाओं के वर्गों के अनुपात के बराबर होता है।
पाइथागोरस प्रमेय: एक समकोण त्रिभुज में, कर्ण का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है। (कर्ण)² = (लम्ब)² + (आधार)²
पाइथागोरस प्रमेय का विलोम: यदि किसी त्रिभुज में एक भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो पहली भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है।
अध्याय 7: निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry)
दूरी सूत्र: दो बिंदुओं P(x₁, y₁) और Q(x₂, y₂) के बीच की दूरी = √[(x₂ – x₁)² + (y₂ – y₁)²]
मूल बिंदु से दूरी: बिंदु P(x, y) की मूल बिंदु (0, 0) से दूरी = √(x² + y²)
विभाजन सूत्र (आंतरिक विभाजन): वह बिंदु P(x, y) जो बिंदुओं A(x₁, y₁) और B(x₂, y₂) को m₁ : m₂ के अनुपात में विभाजित करता है:
x = (m₁x₂ + m₂x₁) / (m₁ + m₂)
y = (m₁y₂ + m₂y₁) / (m₁ + m₂)
मध्यबिंदु सूत्र: A(x₁, y₁) और B(x₂, y₂) के मध्यबिंदु के निर्देशांक = [(x₁ + x₂)/2, (y₁ + y₂)/2]
त्रिभुज का क्षेत्रफल: बिंदुओं (x₁, y₁), (x₂, y₂) और (x₃, y₃) से बने त्रिभुज का क्षेत्रफल = 1/2 |x₁(y₂ – y₃) + x₂(y₃ – y₁) + x₃(y₁ – y₂)|
संरेखीय बिंदुओं के लिए, त्रिभुज का क्षेत्रफल 0 होता है।
अध्याय 8: त्रिकोणमिति का परिचय (Introduction to Trigonometry)
त्रिकोणमितीय अनुपात (समकोण त्रिभुज के लिए):
sin A = लम्ब / कर्ण
cos A = आधार / कर्ण
tan A = लम्ब / आधार
cosec A = कर्ण / लम्ब = 1 / sin A
sec A = कर्ण / आधार = 1 / cos A
cot A = आधार / लम्ब = 1 / tan A
कुछ विशिष्ट कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात:
| कोण (A) | 0° | 30° | 45° | 60° | 90° |
| sin A | 0 | 1/2 | 1/√2 | √3/2 | 1 |
| cos A | 1 | √3/2 | 1/√2 | 1/2 | 0 |
| tan A | 0 | 1/√3 | 1 | √3 | अपरिभाषित |
| cosec A | अपरिभाषित | 2 | √2 | 2/√3 | 1 |
| sec A | 1 | 2/√3 | √2 | 2 | अपरिभाषित |
| cot A | अपरिभाषित | √3 | 1 | 1/√3 | 0 |
पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात:
sin (90° – A) = cos A
cos (90° – A) = sin A
tan (90° – A) = cot A
cot (90° – A) = tan A
sec (90° – A) = cosec A
cosec (90° – A) = sec A
त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ:
sin² A + cos² A = 1
sec² A – tan² A = 1 (जहाँ A ≠ 90°)
cosec² A – cot² A = 1 (जहाँ A ≠ 0°)
अध्याय 9: त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग (Some Applications of Trigonometry)
उन्नयन कोण: दृष्टि रेखा और क्षैतिज रेखा के बीच का कोण, जब वस्तु क्षैतिज स्तर से ऊपर होती है।
अवनमन कोण: दृष्टि रेखा और क्षैतिज रेखा के बीच का कोण, जब वस्तु क्षैतिज स्तर से नीचे होती है।
इन समस्याओं को हल करने के लिए sin, cos, tan के अनुपात और विशिष्ट कोणों के मान का उपयोग किया जाता है।
अध्याय 10: वृत्त (Circles)
स्पर्श रेखा और त्रिज्या: वृत्त के किसी भी बिंदु पर स्पर्श रेखा, स्पर्श बिंदु से होकर जाने वाली त्रिज्या पर लंब होती है।
बाह्य बिंदु से स्पर्श रेखाओं की लंबाई: किसी बाह्य बिंदु से वृत्त पर खींची गई स्पर्श रेखाओं की लंबाइयाँ बराबर होती हैं।
अध्याय 11: रचनाएँ (Constructions)
दिए गए रेखाखंड को दिए गए अनुपात में विभाजित करना।
दिए गए स्केल गुणक के अनुसार एक त्रिभुज के समरूप एक त्रिभुज की रचना करना।
एक वृत्त पर स्पर्श रेखाएँ खींचना (जब केंद्र ज्ञात हो या न हो, बाह्य बिंदु से)।
अध्याय 12: वृत्तों से संबंधित क्षेत्रफल (Areas Related to Circles)
वृत्त की परिधि: 2πr
वृत्त का क्षेत्रफल: πr²
त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल (कोण θ के साथ): (θ / 360°) × πr²
चाप की लंबाई (कोण θ के साथ): (θ / 360°) × 2πr
वृत्तखंड का क्षेत्रफल: त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल – संगत त्रिभुज का क्षेत्रफल
(θ / 360°) × πr² – 1/2 r² sinθ (केंद्र पर बनने वाले कोण के लिए)
वर्ग का क्षेत्रफल: भुजा²
आयतन का क्षेत्रफल: लंबाई × चौड़ाई
अध्याय 13: पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन (Surface Areas and Volumes)
| आकृति | पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA) | कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA) | आयतन (Volume) |
| घनाभ | 2h(l + b) | 2(lb + bh + hl) | lbh |
| घन | 4a² | 6a² | a³ |
| बेलन | 2πrh | 2πr(r + h) | πr²h |
| शंकु | πrl | πr(l + r) | 1/3 πr²h |
| गोला | 4πr² | 4πr² | 4/3 πr³ |
| अर्धगोला | 2πr² | 3πr² | 2/3 πr³ |
| शंकु का छिन्नक | πl(r₁ + r₂) जहाँ l = √[h² + (r₁ – r₂)²] | πl(r₁ + r₂) + π(r₁² + r₂²) | 1/3 πh(r₁² + r₂² + r₁r₂) |
अध्याय 14: सांख्यिकी (Statistics)
माध्य (Mean):
प्रत्यक्ष विधि: x̄ = Σfi xi / Σfi
कल्पित माध्य विधि: x̄ = A + [Σfi di / Σfi], जहाँ di = xi – A
पद विचलन विधि: x̄ = A + [Σfi ui / Σfi] × h, जहाँ ui = (xi – A) / h
माध्यक (Median):
माध्यक वर्ग = वह वर्ग जिसकी संचयी बारंबारता (N/2) से अधिक या बराबर होती है।
माध्यक = L + [(N/2 – cf) / f] × h
जहाँ L = माध्यक वर्ग की निचली सीमा
N = प्रेक्षणों की कुल संख्या
cf = माध्यक वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी बारंबारता
f = माध्यक वर्ग की बारंबारता
h = वर्ग माप
बहुलक (Mode):
बहुलक वर्ग = वह वर्ग जिसकी बारंबारता सबसे अधिक होती है।
बहुलक = L + [(f₁ – f₀) / (2f₁ – f₀ – f₂)] × h
जहाँ L = बहुलक वर्ग की निचली सीमा
f₁ = बहुलक वर्ग की बारंबारता
f₀ = बहुलक वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की बारंबारता
f₂ = बहुलक वर्ग के ठीक बाद वाले वर्ग की बारंबारता
h = वर्ग माप
माध्य, माध्यक और बहुलक के बीच संबंध (आनुभविक सूत्र):
3 माध्यक = बहुलक + 2 माध्य
अध्याय 15: प्रायिकता (Probability)
किसी घटना E की प्रायिकता P(E):
P(E) = (घटना E के अनुकूल परिणामों की संख्या) / (प्रयोग के सभी संभव परिणामों की कुल संख्या)
पूरक घटना की प्रायिकता: P(E) + P(नहीं E) = 1
P(नहीं E) = 1 – P(E)
निश्चित घटना की प्रायिकता: 1
असंभव घटना की प्रायिकता: 0
प्रायिकता का मान: 0 ≤ P(E) ≤ 1
शुभकामनाएं!