वसंत (भाग 3)-8th

              वसंत (भाग 3)

1. ध्वनि (कविता) – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

यह कविता कवि के अदम्य उत्साह और जिजीविषा (जीने की इच्छा) का प्रतीक है। कवि उन आलोचकों को जवाब देते हैं जो कहते हैं कि उनका प्रभाव खत्म हो रहा है। कवि कहते हैं कि उनके जीवन का वसंत अभी शुरू हुआ है। वे प्रकृति के माध्यम से युवाओं को संदेश देते हैं कि जिस तरह वसंत आने पर कलियाँ खिलती हैं, उसी तरह वे अपने ज्ञान के प्रकाश से युवाओं के मन से आलस्य को दूर कर देंगे। उनका लक्ष्य समाज में नई चेतना और ऊर्जा भरना है।

2. लाख की चूड़ियाँ (कहानी) – कामतानाथ

यह कहानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हस्तशिल्प के पतन की मार्मिक दास्तां है। बदलू नाम का एक मनिहार है जो पुश्तैनी रूप से लाख की चूड़ियाँ बनाता है। वह कांच की चूड़ियों को शहरी चमक-धमक और मशीन का प्रतीक मानता है जो कारीगरों की रोजी-रोटी छीन लेती हैं। लेखक जब वर्षों बाद अपने मामा के गाँव जाता है, तो पाता है कि बदलू बेरोजगार हो गया है और बीमार है। लेकिन अंत में, बदलू का स्वाभिमान जीत जाता है क्योंकि वह गरीबी में भी अपनी कला का सौदा नहीं करता।

3. बस की यात्रा (व्यंग्य) – हरिशंकर परसाई

यह पाठ एक तीखा व्यंग्य है जो पुरानी बसों और खराब परिवहन व्यवस्था पर कटाक्ष करता है। लेखक ने उस बस का वर्णन ‘वयोवृद्ध’ महिला के रूप में किया है जिसके पुर्जे जवाब दे चुके हैं। पूरी यात्रा के दौरान डर बना रहता है कि कब इंजन निकल जाए या टायर फट जाए। यह व्यंग्य उन बस मालिकों पर प्रहार करता है जो मुनाफे के लिए लोगों की जान जोखिम में डालते हैं।

4. दीवानों की हस्ती (कविता) – भगवतीचरण वर्मा

कवि ने इस कविता में ऐसे लोगों का वर्णन किया है जो अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं। ये ‘दीवाने’ किसी एक स्थान पर टिक कर नहीं रहते। वे जहाँ भी जाते हैं, खुशियाँ और उल्लास फैलाते हैं। वे दुनिया के सुख-दुख को समान भाव से स्वीकार करते हैं। कविता का संदेश है कि हमें जीवन को निस्वार्थ भाव से जीना चाहिए और दूसरों पर प्रेम लुटाना चाहिए।

5. चिट्ठियों की अनूठी दुनिया (निबंध) – अरविंद कुमार सिंह

यह निबंध पत्रों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है। लेखक बताते हैं कि पत्रों का जो स्थान है, वह आधुनिक तकनीक (SMS, WhatsApp) कभी नहीं ले सकती। पत्र केवल सूचना का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे यादों को सहेजने का ज़रिया हैं। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और लेखकों के पत्र आज भी संग्रहालयों की शोभा हैं और हमें इतिहास की जानकारी देते हैं।

6. भगवान के डाकिए (कविता) – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

कवि ने पक्षी और बादलों को ईश्वर के दूत माना है। ये डाकिए बिना किसी सीमा और पासपोर्ट के एक देश से दूसरे देश जाते हैं। वे मनुष्य को ‘विश्व बंधुत्व’ (Universal Brotherhood) का पाठ पढ़ाते हैं। इंसान तो सीमाओं में बँटा है, लेकिन प्रकृति का प्रेम और सद्भाव एक देश से उठकर दूसरे देश में वर्षा और सुगंध के रूप में पहुँचता है।

7. क्या निराश हुआ जाए (निबंध) – हजारी प्रसाद द्विवेदी

लेखक समाज में व्याप्त बुराइयों, जैसे भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को देखकर चिंतित हैं, लेकिन वे पूरी तरह निराश नहीं हैं। वे अपने जीवन की उन घटनाओं को याद करते हैं जहाँ अजनबियों ने उनकी निस्वार्थ मदद की। निष्कर्ष यह है कि अच्छाई और मानवता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए निराश होने की आवश्यकता नहीं है।

8. यह सबसे कठिन समय नहीं (कविता) – जया जादवानी

यह एक प्रेरणादायक कविता है। कवयित्री कहती हैं कि जब तक प्रकृति में छोटी-छोटी घटनाएँ (जैसे चिड़िया का तिनका ले जाना, रेलगाड़ी का स्टेशन पर आना) हो रही हैं, तब तक निराशा की कोई बात नहीं है। यह समय सबसे कठिन नहीं है क्योंकि अभी भी लोगों के मन में आशा और गंतव्य तक पहुँचने की चाह ज़िंदा है।

9. कबीर की साखियाँ (दोहे) – कबीरदास

कबीर अपनी साखियों के माध्यम से समाज को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। वे कहते हैं कि मनुष्य को बाहरी दिखावे और जाति-पाति के बजाय ज्ञान को महत्व देना चाहिए। वे मधुर वाणी (मीठी बोली) बोलने और अपने भीतर के अहंकार को त्यागने की सलाह देते हैं ताकि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे।

10. कामचोर (कहानी) – इस्मत चुगताई

यह एक हास्य प्रधान कहानी है जो उन बच्चों के बारे में है जिन्हें घर में काम करने की आदत नहीं है। जब उन्हें काम करने का निर्देश दिया जाता है, तो वे पूरे घर को अस्त-व्यस्त कर देते हैं। मुर्गियों को हांकना हो या भैंस का दूध निकालना, वे हर काम में ‘कबाड़ा’ कर देते हैं। यह पाठ सिखाता है कि बच्चों को बचपन से ही छोटे-छोटे काम सिखाने चाहिए।

11. जब सिनेमा ने बोलना सीखा (निबंध) – प्रदीप तिवारी

यह अध्याय भारतीय सिनेमा के एक ऐतिहासिक मोड़ का वर्णन करता है। 14 मार्च, 1931 को पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ रिलीज़ हुई थी। इसने मूक फिल्मों के युग का अंत किया और सिनेमा में आवाज़, संगीत और पार्श्व गायन (Playback Singing) की शुरुआत की। यह लेख अर्देशिर ईरानी के संघर्ष और सिनेमा के विकास की कहानी है।

12. सुदामा चरित (कविता) – नरोत्तमदास

यह कविता कृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता पर आधारित है। सुदामा जब अत्यंत निर्धनता में कृष्ण के पास पहुँचते हैं, तो कृष्ण उनकी हालत देखकर फूट-फूट कर रोते हैं। वे सुदामा के पैरों को धोने के लिए जल के बजाय अपने आंसुओं का प्रयोग करते हैं। यह मित्रता और भक्ति का सबसे सुंदर उदाहरण है।

13. जहाँ पहिया है (रिपोर्ताज) – पी. साईनाथ

यह तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले की एक सच्ची घटना पर आधारित है। यहाँ की ग्रामीण महिलाओं ने साइकिल चलाना सीखकर अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। साइकिल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया, समय की बचत की और उन्हें पुरुषों के वर्चस्व वाले समाज में अपनी पहचान बनाने में मदद की। यह एक महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है।

14. अकबरी लोटा (कहानी) – अन्नपूर्णानंद वर्मा

यह एक बहुत ही रोचक और हास्य कहानी है। लाला झाऊलाल के हाथ से एक लोटा एक अंग्रेज के ऊपर गिर जाता है। झाऊलाल के मित्र पंडित बिलवासी जी अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए उस साधारण लोटे को ‘ऐतिहासिक अकबरी लोटा’ बताकर उस अंग्रेज को बेच देते हैं। इससे झाऊलाल की आर्थिक समस्या भी सुलझ जाती है और अंग्रेज भी खुश हो जाता है।

15. सूर के पद (कविता) – सूरदास

सूरदास ने बालक कृष्ण की बाल-लीलाओं का चित्रण किया है। कृष्ण यशोदा माँ से शिकायत करते हैं कि उनकी चोटी क्यों नहीं बढ़ रही है जबकि वे रोज़ दूध पीते हैं। दूसरे पद में, गोपियाँ कृष्ण की माखन चोरी की शिकायत लेकर यशोदा के पास आती हैं, लेकिन साथ ही वे कृष्ण के प्रति अपना गहरा प्रेम भी व्यक्त करती हैं।

16. पानी की कहानी (निबंध) – रामचंद्र तिवारी

यह एक वैज्ञानिक लेख है जिसे कहानी के रूप में लिखा गया है। ओस की एक बूंद अपनी यात्रा का वर्णन करती है। वह बताती है कि कैसे वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिलने से बनी, कैसे उसने समुद्र की गहराइयों की यात्रा की और कैसे वह फिर से भाप बनकर बादलों में चली गई। यह जल चक्र (Water Cycle) को समझने का एक रचनात्मक तरीका है।

 

17. बाज और साँप (कहानी) – निर्मल वर्मा

यह कहानी दो अलग-अलग स्वभावों का प्रतीक है। साँप अपनी अंधेरी और गंदी गुफा में सुरक्षित रहना पसंद करता है, जबकि बाज़ घायल होने के बावजूद आकाश की ऊंचाइयों को छूना चाहता है। बाज़ का साहस साँप को भी एक बार उड़ने की कोशिश करने के लिए प्रेरित करता है। संदेश यह है कि कायर बनकर जीने से बेहतर है साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना।

18. टोपी (कहानी) – संजय

यह एक गौरैया (चिड़िया) की कहानी है जो कूड़े के ढेर से रुई का एक फाहा पाती है। वह अपनी मेहनत और सूझबूझ से उस रुई को धुनवाती है, सूत कतवाती है, कपड़ा बुनवाती है और अंत में एक सुंदर टोपी बनवाती है। यह कहानी राजा के अहंकार और एक छोटी सी चिड़िया की मेहनत और गौरव के बीच के अंतर को दिखाती है।

वाह, तुमने पूरा कंटेंट बहुत अच्छा इकट्ठा किया है 👌
मैं इसे exam-ready, साफ़-सुथरे, chapter-wise formatted notes में सजा देता हूँ ताकि:

  • पढ़ने में आसान हो
  • रिविज़न जल्दी हो
  • लिखते समय points याद रहें
  • नोट्स / प्रिंट / PDF बनाने में काम आए

नीचे वही पूरा कंटेंट है, बस proper formatting में 👇


📘 CBSE कक्षा 8वीं – हिंदी

वसंत (भाग 3) – महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

(पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों के आधार पर)


🟢 1. ध्वनि – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

प्रश्न: कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
उत्तर: कवि के मन में नया जोश और उत्साह है। वह मानता है कि उसके जीवन में अभी-अभी वसंत का आगमन हुआ है। उसे अभी समाज और युवाओं के लिए बहुत से रचनात्मक कार्य करने हैं, इसलिए उसे विश्वास है कि उसका अंत अभी नहीं होगा।


🟢 2. लाख की चूड़ियाँ – कामतानाथ

प्रश्न: “मशीनी युग ने कितने हाथ काट दिए हैं”—इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने किस व्यथा की ओर संकेत किया है?
उत्तर: लेखक ने उन कारीगरों की व्यथा की ओर संकेत किया है जिनका पुश्तैनी धंधा मशीनों के आने से बंद हो गया है। मशीनों के कारण काम कम समय में और सफाई से होने लगा, जिससे बदलू जैसे कारीगर बेरोजगार हो गए।


🟢 3. बस की यात्रा – हरिशंकर परसाई

प्रश्न: “गजब हो गया, ऐसी बस अपने आप चलती है”—यह सुनकर लेखक को हैरानी क्यों हुई?
उत्तर: बस की हालत बहुत जर्जर थी—टायर घिसे थे, खिड़कियाँ टूटी थीं, पुर्जे हिल रहे थे। उसे देखकर नहीं लगता था कि वह चल भी पाएगी, इसलिए लेखक को हैरानी हुई।


🟢 4. दीवानों की हस्ती – भगवतीचरण वर्मा

प्रश्न: कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू’ क्यों कहा है?
उत्तर: कवि जहाँ जाता है, वहाँ खुशी फैलाता है। लेकिन जब वह चला जाता है, तो लोगों को बिछड़ने का दुःख होता है और उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।


🟢 5. चिट्ठियों की अनूठी दुनिया – अरविंद कुमार सिंह

प्रश्न: पत्र धरोहर हो सकते हैं, लेकिन SMS क्यों नहीं?
उत्तर: पत्रों को वर्षों तक संभालकर रखा जा सकता है और वे भावनाओं व विचारों का स्थायी प्रमाण होते हैं। SMS मोबाइल से मिट जाते हैं और उनमें वह अपनापन और स्थायित्व नहीं होता।


🟢 6. भगवान के डाकिए – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

प्रश्न: पक्षी और बादल द्वारा लाई गई चिट्ठियों को कौन पढ़ पाता है?
उत्तर: उन्हें मनुष्य नहीं, बल्कि प्रकृति के अंग—पेड़, पौधे, पानी और पहाड़—समझ और महसूस कर पाते हैं।


🟢 7. क्या निराश हुआ जाए – हजारी प्रसाद द्विवेदी

प्रश्न: लेखक ठगे जाने के बाद भी निराश क्यों नहीं हैं?
उत्तर: लेखक मानते हैं कि ठगे जाने की घटनाएँ कम हैं, जबकि बिना स्वार्थ मदद करने वाले लोग ज्यादा हैं। इसलिए मानवता अभी जीवित है और निराश होने का कारण नहीं है।


🟢 8. यह सबसे कठिन समय नहीं – जया जादवानी

प्रश्न: चिड़िया तिनका लेकर क्यों उड़ रही है?
उत्तर: वह घोंसला बनाने के लिए तिनका ले जा रही है। यह दिखाता है कि जीवन की सामान्य गतिविधियाँ जारी हैं और समय अभी सबसे कठिन नहीं है।


🟢 9. कबीर की साखियाँ – कबीरदास

प्रश्न: “तलवार का महत्व होता है, म्यान का नहीं”—इससे कबीर क्या कहना चाहते हैं?
उत्तर: मनुष्य की पहचान उसके बाहरी रूप या जाति से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान और गुणों से होनी चाहिए।


🟢 10. कामचोर – इस्मत चुगताई

प्रश्न: बच्चों के ऊधम से घर की क्या हालत हुई?
उत्तर: मटके-सुरहियाँ टूट गईं, मुर्गियाँ फैल गईं, दाल की पतीली उलट गई और पूरे घर में कीचड़ फैल गया। अंत में नौकर बुलाने पड़े।


🟢 11. सुदामा चरित – नरोत्तमदास

प्रश्न: सुदामा की दीन दशा देखकर श्रीकृष्ण की क्या स्थिति हुई?
उत्तर: वे करुणा से भर गए और रो पड़े। उन्होंने अपने आँसुओं से ही सुदामा के पैर धो दिए।


🟢 12. जहाँ पहिया है – पी. साईनाथ

प्रश्न: पुडुकोट्टई की महिलाओं के लिए साइकिल आज़ादी कैसे बनी?
उत्तर: साइकिल से वे आत्मनिर्भर हो गईं, दूर तक काम कर सकती थीं, समय बचता था और आत्मविश्वास बढ़ा।


📗 शेष अध्याय – महत्वपूर्ण प्रश्न

13. जब सिनेमा ने बोलना सीखा – प्रदीप तिवारी

प्रश्न: पहली बोलती फिल्म पर जनता की प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर: ‘आलम आरा’ देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी, पुलिस को संभालना मुश्किल हो गया।

14. अकबरी लोटा – अन्नपूर्णानंद वर्मा

प्रश्न: बिलवासी जी ने क्या कहानी सुनाई?
उत्तर: उन्होंने लोटे को ऐतिहासिक ‘अकबरी लोटा’ बताकर अंग्रेज को बेवकूफ बनाया।

15. सूर के पद – सूरदास

प्रश्न: कृष्ण यशोदा से क्या शिकायत करते हैं?
उत्तर: वे कहते हैं कि दूध पीने पर भी उनकी चोटी बलराम जैसी क्यों नहीं हुई।

16. पानी की कहानी – रामचंद्र तिवारी

प्रश्न: ओस की बूंद ने अपनी उत्पत्ति कैसे बताई?
उत्तर: उसने बताया कि उसका जन्म हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रिया से हुआ।

17. बाज और साँप – निर्मल वर्मा

प्रश्न: लहरों ने बाज की मृत्यु पर गीत क्यों गाया?
उत्तर: उसके साहस और स्वतंत्रता प्रेम के सम्मान में।

18. टोपी – संजय

प्रश्न: गौरैया और गवरा की सोच में अंतर क्या था?
उत्तर: गौरैया महत्वाकांक्षी थी, गवरा संतोषी और परंपरावादी था।


📙 व्याकरण (Grammar) – महत्वपूर्ण टॉपिक्स

1. संधि और समास

  • हिमालय = हिम + आलय
  • नरेंद्र = नर + इंद्र
  • दशानन = बहुव्रीहि समास
  • यथाशक्ति = अव्ययीभाव समास

अभ्यास:

  • सज्जन = सत् + जन
  • परोपकार = पर + उपकार

2. मुहावरे

  • 9-2-11 होना = भाग जाना
  • दाँतों तले उँगली दबाना = हैरान होना
  • पीठ थपथपाना = शाबाशी देना

3. उपसर्ग और प्रत्यय

उपसर्ग: अभिमान (अभि), अनुशासन (अनु), उपहार (उप)
प्रत्यय: लिखावट (आवट), साप्ताहिक (इक), बलवान (वान)

  • पत्र लेखन:
    • औपचारिक: प्रधानाचार्य को अवकाश पत्र
    • अनौपचारिक: मित्र / पिता को पत्र

✅ परीक्षा टिप्स

✔ कीवर्ड underline करो
✔ कविता में 1–2 पंक्तियाँ quote करो
✔ उत्तर point-wise लिखो
✔ लेखक/कवि का नाम याद रखो


😊

Leave a comment