भारत की खोज -8th

‘भारत की खोज’


1. अहमदनगर का किला (जेल की यादें और इतिहास लेखन)

विस्तृत सारांश:
नेहरू जी ने यह पुस्तक 1944 में अहमदनगर के किले में अपनी नौवीं जेल यात्रा के दौरान लिखी थी। उन्होंने वहाँ बागवानी (Gardening) का काम शुरू किया। वे तपती धूप में भी फूलों की क्यारियाँ बनाते थे। मिट्टी खोदते समय उन्हें प्राचीन दीवारों के अवशेष और गुंबदों के हिस्से मिले। वे मिट्टी के माध्यम से भारत के इतिहास की परतों को समझना चाहते थे। नेहरू जी कहते हैं कि “इतिहास का दबाव” मनुष्य को प्रभावित करता है। वे अतीत के भारी बोझ से दबना नहीं चाहते थे, बल्कि उससे शक्ति प्राप्त कर वर्तमान को बेहतर बनाना चाहते थे। उन्होंने ‘चाँद’ को अपना साथी माना, जो उन्हें याद दिलाता था कि अँधेरे के बाद उजाला अवश्य आता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न:

  • प्रश्न: नेहरू जी ने बागवानी छोड़कर लिखना क्यों शुरू किया?
  • उत्तर: नेहरू जी ने महसूस किया कि केवल खुदाई से प्राप्त अवशेषों से इतिहास नहीं समझा जा सकता। वे वर्तमान के माध्यम से अतीत को देखना चाहते थे। चूँकि जेल में वे कुछ ‘कर’ नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने लिखने का निश्चय किया ताकि वे भारत के गौरवशाली अतीत और वर्तमान के बीच एक कड़ी (Bridge) बना सकें।
  • प्रश्न: ‘चाँद’ नेहरू जी के लिए किस बात का प्रतीक था?
  • उत्तर: चाँद उनके लिए समय के बीतने और जीवन के चक्र का प्रतीक था। वह उन्हें याद दिलाता था कि हर दुख की रात के बाद सुख की सुबह आती है और जीवन में बदलाव निश्चित है।

2. तलाश (भारत की आत्मा और शक्ति)

विस्तृत सारांश:
नेहरू जी ने पूरे भारत की यात्रा की ताकि वे जान सकें कि ‘भारत’ वास्तव में क्या है? उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक समय तक की यात्रा की। उन्होंने देखा कि भारत के किसान गरीब और अशिक्षित होने के बावजूद एक अद्भुत गरिमा और प्राचीन संस्कृति को अपने भीतर समेटे हुए हैं। यहीं उन्होंने “विविधता में एकता” का सूत्र दिया। उन्होंने पाया कि भारत के उत्तर से दक्षिण तक लोगों की समस्याएँ एक जैसी हैं और उनकी सांस्कृतिक जड़ें एक ही हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्न:

  • प्रश्न: नेहरू जी ने ‘भारत माता’ का क्या अर्थ बताया?
  • उत्तर: जब किसान ‘भारत माता की जय’ कहते थे, तो नेहरू जी उन्हें समझाते थे कि भारत केवल यहाँ की नदियाँ, पहाड़ और उपजाऊ भूमि नहीं है। भारत का अर्थ यहाँ के करोड़ों लोग हैं। उन लोगों की जय ही ‘भारत माता की जय’ है।
  • प्रश्न: भारत की शक्ति और सीमा क्या है?
  • उत्तर: भारत की शक्ति इसकी प्राचीन संस्कृति और सहनशीलता है। इसकी सीमा (कमजोरी) मध्यकाल के बाद आई मानसिक जड़ता और अंधविश्वास है, जिसने भारत को पिछड़ा बना दिया।

3. सिंधु घाटी सभ्यता (प्राचीन गौरव)

विस्तृत सारांश:
यह अध्याय भारत के 5000 साल पुराने इतिहास को दिखाता है। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खोज ने दुनिया को बताया कि भारत तब भी सभ्य था जब बाकी दुनिया विकसित नहीं थी। यहाँ की नगर नियोजन (Town Planning), चौड़ी सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम अद्भुत था। यह एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) सभ्यता थी जहाँ व्यापार और कृषि का बोलबाला था।

महत्वपूर्ण प्रश्न:

  • प्रश्न: सिंधु घाटी सभ्यता को एक ‘आधुनिक सभ्यता’ क्यों कहा जा सकता है?
  • उत्तर: क्योंकि वहाँ के शहरों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। वहाँ स्वच्छता का ध्यान रखा गया था, पक्की ईंटों के मकान थे और एक उन्नत ड्रेनेज सिस्टम था, जो आज के समय में भी प्रेरणा देता है।

4. युगों का दौर (विचारधाराओं का विकास)

विस्तृत सारांश:
इस अध्याय में उपनिषद, भगवद गीता, बुद्ध और मौर्य साम्राज्य का वर्णन है। नेहरू जी चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ की प्रशंसा करते हैं जो राजनीति और कूटनीति का महान ग्रंथ है। वे अशोक के शांति संदेशों और गुप्त काल के स्वर्ण युग (Art and Literature) की बात करते हैं। यह काल भारत के मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान का काल था।

महत्वपूर्ण प्रश्न:

  • प्रश्न: चाणक्य के ‘अर्थशास्त्र’ की मुख्य विशेषता क्या है?
  • उत्तर: यह ग्रंथ केवल अर्थ (धन) पर नहीं, बल्कि शासन कला, राजनीति, समाज और युद्ध नीति पर आधारित है। यह बताता है कि एक राजा को प्रजा के प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए।
  • प्रश्न: अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद क्या संदेश दिया?
  • उत्तर: अशोक ने युद्ध और विजय के बजाय प्रेम, अहिंसा और जन-कल्याण के मार्ग को चुना। उन्होंने बौद्ध धर्म के माध्यम से शांति का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।

5. नयी समस्याएँ (सांस्कृतिक समन्वय)

विस्तृत सारांश:
भारत में अरबों, तुर्कों और मुगलों का आगमन हुआ। यहाँ बाहरी संस्कृतियों और भारतीय संस्कृति का टकराव हुआ। लेकिन धीरे-धीरे भारत ने इन संस्कृतियों को अपने भीतर समाहित (Absorb) कर लिया। इसी काल में ‘भक्ति आंदोलन’ और ‘सूफीवाद’ का जन्म हुआ, जिसने प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा दिया। अमीर खुसरो और कबीर जैसे कवियों ने एक साझी संस्कृति (Composite Culture) का निर्माण किया।


6 & 7. अंतिम दौर (ब्रिटिश शासन और राष्ट्रवाद)

विस्तृत सारांश:
ये अध्याय बताते हैं कि अंग्रेज व्यापार के बहाने आए और शासक बन गए। अंग्रेजों ने भारत के पारंपरिक उद्योगों (जैसे कपड़ा उद्योग) को नष्ट कर दिया। इसके विरोध में 1857 की क्रांति हुई और फिर राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती और तिलक जैसे नेताओं ने सामाजिक सुधार और स्वतंत्रता की अलख जगाई। महात्मा गांधी के आगमन ने भारतीय राजनीति को पूरी तरह बदल दिया और इसे जन-आंदोलन बना दिया।


8. तनाव (1942 का संघर्ष)

विस्तृत सारांश:
यह द्वितीय विश्व युद्ध का समय था। अंग्रेजों ने भारतीयों की इच्छा के विरुद्ध उन्हें युद्ध में झोंक दिया। इससे देश में भारी तनाव पैदा हुआ। गांधी जी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) का नारा दिया। जनता में गुस्सा था और आजादी की तड़प चरम पर थी। नेहरू जी सहित सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।


9. दो पृष्ठभूमियाँ (भारतीय और अंग्रेज़ी)

विस्तृत सारांश:
यहाँ दो अलग सोच का टकराव है। एक ओर अंग्रेजों की सोच थी जो भारत को केवल एक उपनिवेश (Colony) और बाजार मानते थे। दूसरी ओर भारतीयों की सोच थी जो अपनी खोई हुई गरिमा और स्वाभिमान को वापस पाना चाहते थे। अंग्रेजों ने आधुनिक शिक्षा तो दी, लेकिन उनका उद्देश्य क्लर्क पैदा करना था, जबकि भारतीयों ने उस शिक्षा का उपयोग स्वतंत्रता की चेतना जगाने में किया।


परीक्षा के लिए ‘गोल्डन टिप्स’:

  • कौटिल्य और अर्थशास्त्र: इस पर प्रश्न आने की 90% संभावना रहती है।
  • विविधता में एकता: नेहरू जी का यह विचार सबसे महत्वपूर्ण है।
  • भारत माता: नेहरू जी के अनुसार भारत माता क्या है, इसे अपने शब्दों में लिखें।
  • तुलना: सिंधु घाटी सभ्यता और आधुनिक सभ्यता की तुलना याद रखें।

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