भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
1. आर्थिक कार्यों का वर्गीकरण
आर्थिक गतिविधियों को तीन प्रमुख क्षेत्रकों में बांटा जा सकता है:
प्राथमिक क्षेत्रक (कृषि एवं सहायक क्षेत्रक): जब हम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन करते हैं, तो उसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है। उदाहरण: कृषि, डेयरी, मछली पकड़ना और खनन।
द्वितीयक क्षेत्रक (औद्योगिक क्षेत्रक): इस क्षेत्रक में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के ज़रिए अन्य रूपों में बदला जाता है। इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। उदाहरण: कपास से सूत और कपड़ा बनाना, गन्ने से चीनी बनाना।
तृतीयक क्षेत्रक (सेवा क्षेत्रक): यह क्षेत्रक प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में मदद करता है। यह वस्तुओं का उत्पादन नहीं करता, बल्कि सेवाओं का सृजन करता है, इसलिए इसे ‘सेवा क्षेत्रक’ भी कहा जाता है। उदाहरण: परिवहन, बैंकिंग, व्यापार, भंडारण और संचार।
2. तीनों क्षेत्रकों की तुलना
सकल घरेलू उत्पाद (GDP): किसी विशेष वर्ष में प्रत्येक क्षेत्रक द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य उस वर्ष में देश के कुल उत्पादन की जानकारी प्रदान करता है। तीनों क्षेत्रकों के उत्पादनों के योगफल को देश का सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) कहते हैं।
ऐतिहासिक परिवर्तन: विकसित देशों में, आर्थिक विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं में प्राथमिक क्षेत्रक ही सबसे महत्वपूर्ण रहा है। बाद में, उत्पादन द्वितीयक क्षेत्रक में और फिर तृतीयक क्षेत्रक में स्थानांतरित हो गया।
भारतीय संदर्भ: भारत में, तृतीयक क्षेत्रक उत्पादन के मामले में सबसे बड़ा क्षेत्रक बन गया है, लेकिन रोज़गार के मामले में प्राथमिक क्षेत्रक आज भी सबसे बड़ा नियोक्ता है।
3. क्षेत्रकों का विभाजन: संगठित और असंगठित
संगठित क्षेत्रक:
इसमें वे उद्यम या कार्य-स्थान आते हैं जहाँ रोज़गार की अवधि नियमित होती है और लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है।
ये सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं और उन्हें सरकारी नियमों का पालन करना होता है।
इसमें नौकरी की सुरक्षा, निश्चित काम के घंटे, सवेतन छुट्टी, भविष्य निधि और पेंशन जैसे लाभ मिलते हैं।
उदाहरण: सरकारी कर्मचारी, बैंक कर्मचारी, और बड़ी पंजीकृत कंपनियों के मज़दूर।
असंगठित क्षेत्रक:
यह छोटी-छोटी और बिखरी इकाइयों से बना होता है जो ज़्यादातर सरकारी नियंत्रण से बाहर होती हैं।
यहाँ कम वेतन, अनियमित काम और नौकरी की कोई सुरक्षा या अन्य लाभ नहीं होते हैं।
उदाहरण: दिहाड़ी मज़दूर, सड़क पर ठेला लगाने वाले और छोटी दुकानों के कर्मचारी।
4. असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का संरक्षण
असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता की आवश्यकता है। सरकार यह कर सकती है:
न्यूनतम मज़दूरी और काम के घंटे तय करना।
स्वरोज़गार करने वालों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराना।
शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाएँ सस्ती दरों पर देना।
नए कानून बनाना जो सवेतन छुट्टी, बीमारी की छुट्टी आदि का प्रावधान करें।
5. स्वामित्व के आधार पर क्षेत्रक: सार्वजनिक और निजी
सार्वजनिक क्षेत्रक:
इसमें अधिकांश परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है और सरकार ही सभी सेवाएँ उपलब्ध कराती है।
इसका मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक कल्याण होता है।
उदाहरण: रेलवे, डाकघर और BSNL।
निजी क्षेत्रक:
इसमें परिसंपत्तियों का स्वामित्व और सेवाओं का वितरण निजी व्यक्तियों या कंपनियों के हाथों में होता है।
इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
उदाहरण: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड (TISCO) और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL)।
6. बेरोजगारी
प्रच्छन्न बेरोजगारी (अल्प बेरोजगारी): यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लोग प्रत्यक्ष रूप से काम करते हुए तो दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वे अपनी क्षमता से कम काम कर रहे होते हैं। यदि कुछ लोगों को उस काम से हटा दिया जाए, तो भी कुल उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। यह ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र में बहुत आम है।
अतिरिक्त रोजगार का सृजन कैसे हो?
सरकार बांध, नहर और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं में निवेश कर सकती है।
अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों और सेवाओं को बढ़ावा देना।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार करके बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा की जा सकती हैं।
पर्यटन और क्षेत्रीय शिल्प उद्योगों को प्रोत्साहित करना।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा 2005): यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में उन सभी लोगों को, जो काम करने में सक्षम हैं और जिन्हें काम की ज़रूरत है, साल में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी देता है। यदि सरकार रोज़गार देने में असफल रहती है, तो वह लोगों को बेरोज़गारी भत्ता देती है।
🔹 1. आर्थिक गतिविधियाँ (Economic Activities)
- वे गतिविधियाँ जिनसे लोग जीवन यापन के लिए धन अर्जित करते हैं।
- इन गतिविधियों को तीन मुख्य क्षेत्रों में बाँटा गया है:
- प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)
- द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)
- तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector)
🔹 2. प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)
● परिभाषा:
- वह क्षेत्र जो प्रकृति पर आधारित है, जहाँ प्राकृतिक संसाधनों का सीधा दोहन होता है।
● उदाहरण:
- खेती, मछली पालन, पशुपालन, वानिकी, खनन।
● विशेषताएँ:
- कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत में अधिक लोग इसमें कार्यरत हैं।
- यह उत्पादन का प्रारंभिक आधार है।
🔹 3. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)
● परिभाषा:
- वह क्षेत्र जिसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल को संसाधित कर नया उत्पाद बनाया जाता है।
● उदाहरण:
- फैक्ट्रियाँ, चीनी मिल, वस्त्र उद्योग, सीमेंट कारखाने।
● विशेषताएँ:
- इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है।
- यह आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🔹 4. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector)
● परिभाषा:
- वह क्षेत्र जो सेवाएँ प्रदान करता है जो अन्य दोनों क्षेत्रों को समर्थन देता है।
● उदाहरण:
- बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, बीमा।
● विशेषताएँ:
- यह आधुनिक अर्थव्यवस्था का रीढ़ बन चुका है।
- यह सेवा क्षेत्र भी कहलाता है।
🔹 5. क्षेत्रों में बदलाव और विकास
- प्रारंभ में प्राथमिक क्षेत्र प्रमुख था।
- धीरे-धीरे द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का योगदान बढ़ा।
- वर्तमान में तृतीयक क्षेत्र सबसे अधिक राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान करता है, फिर भी सबसे अधिक लोग प्राथमिक क्षेत्र में कार्यरत हैं।
🔹 6. उत्पादन का तुलनात्मक अध्ययन
क्षेत्र | उत्पादन में योगदान | रोजगार में योगदान |
---|---|---|
प्राथमिक | कम | सबसे अधिक |
द्वितीयक | मध्यम | मध्यम |
तृतीयक | सबसे अधिक | कम/मध्यम |
👉 इससे पता चलता है कि प्राथमिक क्षेत्र में Underemployment (अपूर्ण रोजगार) है।
🔹 7. संगठित एवं असंगठित क्षेत्र
● संगठित क्षेत्र:
- नियम-कायदे, निश्चित कार्य समय।
- कर्मचारी पंजीकृत होते हैं।
- सामाजिक सुरक्षा जैसे: पीएफ, छुट्टी, पेंशन आदि।
● असंगठित क्षेत्र:
- कोई निश्चित नियम नहीं।
- कम वेतन, कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं।
- जैसे: खेतिहर मजदूर, घरेलू नौकर, छोटे दुकानदार।
🔹 8. सरकारी भूमिका (Government’s Role)
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सुरक्षा देना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, रोजगार योजनाओं की व्यवस्था।
- मनरेगा योजना जैसे कार्यक्रम द्वारा ग्रामीण लोगों को 100 दिन का रोजगार देना।
🔹 9. सकल घरेलू उत्पाद (GDP – Gross Domestic Product)
- एक वर्ष में सभी क्षेत्रों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य।
- भारत में राष्ट्रीय आय की गणना सरकार द्वारा की जाती है।
- तीनों क्षेत्रों का योगदान GDP में सम्मिलित होता है।
📝 महत्त्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न एवं उत्तर
प्र.1: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
विशेषताएँ | प्राथमिक क्षेत्र | द्वितीयक क्षेत्र | तृतीयक क्षेत्र |
---|---|---|---|
आधार | प्रकृति आधारित | कच्चे माल पर आधारित | सेवाओं पर आधारित |
उदाहरण | कृषि, मछली पालन | फैक्ट्रियाँ, मिलें | बैंक, शिक्षा, परिवहन |
उत्पाद | प्राकृतिक उत्पाद | संसाधित वस्तुएँ | सेवाएँ |
प्र.2: असंगठित क्षेत्र की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
- कार्य का समय और वेतन तय नहीं।
- कोई बीमा, छुट्टी या पेंशन नहीं।
- असुरक्षित और अस्थिर रोजगार।
- उदाहरण: खेतिहर मजदूर, सड़क किनारे दुकानदार।
प्र.3: मनरेगा योजना क्या है?
उत्तर:
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 में लागू हुआ।
- ग्रामीण क्षेत्रों के वयस्कों को 100 दिन का रोजगार देना अनिवार्य है।
- यदि रोजगार नहीं दिया गया तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
प्र.4: GDP से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
- GDP (सकल घरेलू उत्पाद) एक वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य होता है।
प्र.5: सरकार तृतीयक क्षेत्र को कैसे बढ़ावा दे सकती है?
उत्तर:
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करना।
- सड़कें, बिजली, जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार।
- डिजिटल सेवाओं और बैंकिंग सुविधाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुँचाना।
यह रहे अध्याय “भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र” (Sectors of Indian Economy) के कुछ लंबे उत्तर वाले प्रश्न (Long Answer Questions) और उनके विस्तृत उत्तर, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
📝 लंबे उत्तर वाले प्रश्न – उत्तर सहित
❓ प्रश्न 1: भारत की अर्थव्यवस्था को किन-किन क्षेत्रों में बाँटा गया है? प्रत्येक क्षेत्र की विशेषताएँ एवं उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत की अर्थव्यवस्था को उसके कार्यों की प्रकृति के आधार पर तीन प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा गया है:
1. प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector):
- यह क्षेत्र प्रकृति पर आधारित है।
- इसमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष दोहन होता है।
- इसमें ज्यादातर लोग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और कृषि आधारित काम करते हैं।
उदाहरण:
कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, वानिकी, खनन आदि।
2. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector):
- इसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल को संसाधित कर नए उत्पाद बनाए जाते हैं।
- इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहते हैं।
- इसमें निर्माण, उत्पादन, फैक्ट्री, बिजली आदि से संबंधित कार्य आते हैं।
उदाहरण:
कपड़ा उद्योग, इस्पात कारखाने, चीनी मिलें, सीमेंट उद्योग।
3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector):
- यह सेवाएँ प्रदान करता है जो पहले दो क्षेत्रों के कामों को सरल बनाता है।
- इसमें प्रत्यक्ष रूप से कोई वस्तु का उत्पादन नहीं होता, परंतु यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
उदाहरण:
बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, संचार, बीमा, स्वास्थ्य सेवाएँ।
🔹 इन तीनों क्षेत्रों का अपना अलग महत्त्व है और ये एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
❓ प्रश्न 2: असंगठित क्षेत्र क्या है? इसमें कार्य करने वाले श्रमिकों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए सरकारी उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
असंगठित क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें कार्य करने वाले लोगों को उचित सुरक्षा, सुविधा एवं निश्चित वेतन की व्यवस्था नहीं होती। ये क्षेत्र सरकार द्वारा नियमित नहीं होते।
🔸 असंगठित क्षेत्र की विशेषताएँ:
- वेतन निश्चित नहीं होता।
- कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं जैसे बीमा, पेंशन, छुट्टियाँ आदि।
- कार्य के घंटे तय नहीं होते।
- अधिक श्रम, कम आय।
🔸 इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग:
- खेतिहर मजदूर
- घरेलू नौकर
- सड़क विक्रेता
- निर्माण स्थल के मजदूर
- रिक्शा चालक आदि।
🔸 इनकी समस्याएँ:
- न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती।
- बेरोजगारी का डर हमेशा बना रहता है।
- स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहते हैं।
- बच्चों की शिक्षा नहीं हो पाती।
🔸 सरकारी उपाय:
- मनरेगा (MGNREGA): ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को 100 दिन का रोजगार देना।
- जन-धन योजना: गरीबों को बैंकिंग सुविधा देना।
- स्वास्थ्य बीमा योजना और श्रमिक कार्ड जैसी योजनाएँ चलाई गईं।
- राज्य सरकारों द्वारा श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करना।
🔹 इन उपायों से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
❓ प्रश्न 3: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है? भारत की अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों का GDP में योगदान समझाइए।
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में देश की सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को कहा जाता है।
🔸 GDP की परिभाषा:
“GDP = एक वर्ष में देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य”
🔸 भारत में GDP का योगदान:
क्षेत्र | GDP में योगदान | रोजगार में भागीदारी |
---|---|---|
प्राथमिक | कम | सर्वाधिक |
द्वितीयक | मध्यम | मध्यम |
तृतीयक | सबसे अधिक | कम/मध्यम |
🔸 विशेष तथ्य:
- तृतीयक क्षेत्र का GDP में योगदान सबसे अधिक है, लेकिन वहाँ कम लोग कार्यरत हैं।
- प्राथमिक क्षेत्र में सबसे अधिक लोग कार्यरत हैं, लेकिन उत्पादन कम है।
- इससे अपूर्ण रोजगार (Underemployment) की स्थिति स्पष्ट होती है।
🔹 GDP देश की आर्थिक प्रगति को मापने का एक प्रमुख संकेतक है।
❓ प्रश्न 4: सरकार को क्यों और कैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की मदद करनी चाहिए?
उत्तर:
भारत की लगभग 90% कार्यशील जनसंख्या असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि सरकार इनके लिए विशेष कदम उठाए।
🔸 सरकार को मदद क्यों करनी चाहिए?
- ये श्रमिक गरीब और असहाय होते हैं।
- उन्हें स्थिर आय की आवश्यकता होती है।
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है।
- उनका जीवन स्तर बहुत निम्न होता है।
🔸 सरकार क्या कर सकती है?
- कानूनी सुरक्षा: न्यूनतम मजदूरी कानून को सख्ती से लागू करना।
- रोजगार योजनाएँ: मनरेगा जैसी योजनाओं से नियमित रोजगार देना।
- बीमा योजना: श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा।
- बैंकिंग सुविधा: जन धन योजना के अंतर्गत बैंक खाता और ऋण।
- श्रमिक कार्ड: जिससे उन्हें सरकारी सुविधाएँ मिल सकें।
🔹 निष्कर्षतः, सरकार की सक्रिय भागीदारी से असंगठित क्षेत्र के लोगों को एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य मिल सकता है।
“भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र” (Sectors of Indian Economy) के कुछ लंबे उत्तर वाले प्रश्न (Long Answer Questions) और उनके विस्तृत उत्तर, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
📝 लंबे उत्तर वाले प्रश्न – उत्तर सहित
❓ प्रश्न 1: भारत की अर्थव्यवस्था को किन-किन क्षेत्रों में बाँटा गया है? प्रत्येक क्षेत्र की विशेषताएँ एवं उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत की अर्थव्यवस्था को उसके कार्यों की प्रकृति के आधार पर तीन प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा गया है:
1. प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector):
- यह क्षेत्र प्रकृति पर आधारित है।
- इसमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष दोहन होता है।
- इसमें ज्यादातर लोग ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और कृषि आधारित काम करते हैं।
उदाहरण:
कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, वानिकी, खनन आदि।
2. द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector):
- इसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल को संसाधित कर नए उत्पाद बनाए जाते हैं।
- इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहते हैं।
- इसमें निर्माण, उत्पादन, फैक्ट्री, बिजली आदि से संबंधित कार्य आते हैं।
उदाहरण:
कपड़ा उद्योग, इस्पात कारखाने, चीनी मिलें, सीमेंट उद्योग।
3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector):
- यह सेवाएँ प्रदान करता है जो पहले दो क्षेत्रों के कामों को सरल बनाता है।
- इसमें प्रत्यक्ष रूप से कोई वस्तु का उत्पादन नहीं होता, परंतु यह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
उदाहरण:
बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, संचार, बीमा, स्वास्थ्य सेवाएँ।
🔹 इन तीनों क्षेत्रों का अपना अलग महत्त्व है और ये एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
❓ प्रश्न 2: असंगठित क्षेत्र क्या है? इसमें कार्य करने वाले श्रमिकों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए सरकारी उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
असंगठित क्षेत्र वह क्षेत्र है जिसमें कार्य करने वाले लोगों को उचित सुरक्षा, सुविधा एवं निश्चित वेतन की व्यवस्था नहीं होती। ये क्षेत्र सरकार द्वारा नियमित नहीं होते।
🔸 असंगठित क्षेत्र की विशेषताएँ:
- वेतन निश्चित नहीं होता।
- कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं जैसे बीमा, पेंशन, छुट्टियाँ आदि।
- कार्य के घंटे तय नहीं होते।
- अधिक श्रम, कम आय।
🔸 इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग:
- खेतिहर मजदूर
- घरेलू नौकर
- सड़क विक्रेता
- निर्माण स्थल के मजदूर
- रिक्शा चालक आदि।
🔸 इनकी समस्याएँ:
- न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलती।
- बेरोजगारी का डर हमेशा बना रहता है।
- स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहते हैं।
- बच्चों की शिक्षा नहीं हो पाती।
🔸 सरकारी उपाय:
- मनरेगा (MGNREGA): ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को 100 दिन का रोजगार देना।
- जन-धन योजना: गरीबों को बैंकिंग सुविधा देना।
- स्वास्थ्य बीमा योजना और श्रमिक कार्ड जैसी योजनाएँ चलाई गईं।
- राज्य सरकारों द्वारा श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करना।
🔹 इन उपायों से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।
❓ प्रश्न 3: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है? भारत की अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों का GDP में योगदान समझाइए।
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में देश की सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को कहा जाता है।
🔸 GDP की परिभाषा:
“GDP = एक वर्ष में देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य”
🔸 भारत में GDP का योगदान:
क्षेत्र | GDP में योगदान | रोजगार में भागीदारी |
---|---|---|
प्राथमिक | कम | सर्वाधिक |
द्वितीयक | मध्यम | मध्यम |
तृतीयक | सबसे अधिक | कम/मध्यम |
🔸 विशेष तथ्य:
- तृतीयक क्षेत्र का GDP में योगदान सबसे अधिक है, लेकिन वहाँ कम लोग कार्यरत हैं।
- प्राथमिक क्षेत्र में सबसे अधिक लोग कार्यरत हैं, लेकिन उत्पादन कम है।
- इससे अपूर्ण रोजगार (Underemployment) की स्थिति स्पष्ट होती है।
🔹 GDP देश की आर्थिक प्रगति को मापने का एक प्रमुख संकेतक है।
❓ प्रश्न 4: सरकार को क्यों और कैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की मदद करनी चाहिए?
उत्तर:
भारत की लगभग 90% कार्यशील जनसंख्या असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि सरकार इनके लिए विशेष कदम उठाए।
🔸 सरकार को मदद क्यों करनी चाहिए?
- ये श्रमिक गरीब और असहाय होते हैं।
- उन्हें स्थिर आय की आवश्यकता होती है।
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव होता है।
- उनका जीवन स्तर बहुत निम्न होता है।
🔸 सरकार क्या कर सकती है?
- कानूनी सुरक्षा: न्यूनतम मजदूरी कानून को सख्ती से लागू करना।
- रोजगार योजनाएँ: मनरेगा जैसी योजनाओं से नियमित रोजगार देना।
- बीमा योजना: श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा।
- बैंकिंग सुविधा: जन धन योजना के अंतर्गत बैंक खाता और ऋण।
- श्रमिक कार्ड: जिससे उन्हें सरकारी सुविधाएँ मिल सकें।
🔹 निष्कर्षतः, सरकार की सक्रिय भागीदारी से असंगठित क्षेत्र के लोगों को एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य मिल सकता है।
अध्याय 2: भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Sectors of Indian Economy) से संबंधित परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं। ये सभी प्रश्न NCERT व बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से बनाए गए हैं।
📘 अध्याय 2 – भारत की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
🎯 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (Important Exam Questions and Answers)
🔹 1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्र.1: निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य तृतीयक क्षेत्र में आता है?
(a) दूध निकालना
(b) गेहूँ उगाना
(c) ट्रक चलाना
(d) कपड़ा बनाना
उत्तर: (c) ट्रक चलाना
प्र.2: मनरेगा योजना किस वर्ष लागू की गई थी?
(a) 2002
(b) 2005
(c) 2010
(d) 2013
उत्तर: (b) 2005
प्र.3: GDP की गणना कौन करता है?
उत्तर: भारत सरकार
🔹 2. एक पंक्ति / लघु उत्तरीय प्रश्न
प्र.1: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
उत्तर: एक वर्ष में देश के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य GDP कहलाता है।
प्र.2: असंगठित क्षेत्र का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: खेतिहर मजदूर
प्र.3: भारत की अर्थव्यवस्था को कितने क्षेत्रों में विभाजित किया गया है?
उत्तर: तीन — प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक
🔹 3. तीन अंक वाले प्रश्न
प्र.1: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्र | कार्य की प्रकृति | उदाहरण |
---|---|---|
प्राथमिक | प्रकृति से सीधा संसाधन | कृषि, पशुपालन, मछली पालन |
द्वितीयक | कच्चे माल का संसाधन | फैक्ट्री, निर्माण कार्य |
तृतीयक | सेवाएँ प्रदान करना | बैंक, परिवहन, शिक्षा |
🔹 4. पाँच अंक वाले दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्र.1: असंगठित क्षेत्र की समस्याएँ क्या हैं? इन्हें दूर करने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
उत्तर:
समस्याएँ:
- अनिश्चित कार्य व वेतन
- कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं
- कार्य की कोई समय-सीमा नहीं
- बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं का अभाव
उपाय:
- न्यूनतम मजदूरी लागू करना
- स्वास्थ्य बीमा देना
- मनरेगा जैसी योजनाओं का विस्तार
- सरकारी पहचान पत्र, श्रमिक कार्ड देना
- काम की गारंटी सुनिश्चित करना
प्र.2: GDP में तृतीयक क्षेत्र की भूमिका क्या है?
उत्तर:
- तृतीयक क्षेत्र का GDP में योगदान बढ़ता जा रहा है।
- यह सेवाएँ प्रदान करता है जैसे: बैंक, परिवहन, शिक्षा, संचार आदि।
- अन्य दो क्षेत्रों की निर्भरता इस पर है।
- आधुनिक अर्थव्यवस्था में यह सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।
सीबीएसई कक्षा 10 के अर्थशास्त्र के अध्याय 2, “भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक” के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर यहाँ दिए गए हैं:
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
प्रश्न 1: आर्थिक गतिविधियों के आधार पर अर्थव्यवस्था को किन तीन क्षेत्रकों में बांटा गया है?
उत्तर: आर्थिक गतिविधियों के आधार पर अर्थव्यवस्था को तीन क्षेत्रकों में बांटा गया है:
प्राथमिक क्षेत्रक
द्वितीयक क्षेत्रक
तृतीयक क्षेत्रक
प्रश्न 2: तृतीयक क्षेत्रक को ‘सेवा क्षेत्रक’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: चूँकि तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन करती हैं, इसलिए इसे ‘सेवा क्षेत्रक’ भी कहा जाता है।[1]
प्रश्न 3: प्रच्छन्न (छिपी हुई) बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: प्रच्छन्न बेरोजगारी एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी काम में ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे होते हैं। यदि कुछ लोगों को हटा भी दिया जाए तो उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता।[2]
प्रश्न 4: सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) क्या है?
उत्तर: किसी विशेष वर्ष में किसी देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कहलाता है।[1]
प्रश्न 5: संगठित क्षेत्रक की कोई एक विशेषता बताइए।
उत्तर: संगठित क्षेत्रक में रोजगार की अवधि नियमित होती है और यह सरकार द्वारा पंजीकृत होता है।[1]
लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्रश्न 1: आर्थिक गतिविधियाँ क्या हैं? प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक में उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक गतिविधियाँ: वे सभी क्रियाकलाप जिनको करके जीवनयापन के लिए आय प्राप्त की जाती है, आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।[3]
प्राथमिक क्षेत्रक: इसमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करके वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है। इसे कृषि व सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं। उदाहरण: कृषि, खनन, डेयरी।[3]
द्वितीयक क्षेत्रक: इसमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त वस्तुओं को लेकर नई वस्तुओं का विनिर्माण किया जाता है। इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। उदाहरण: कपास से कपड़ा बनाना, गन्ने से चीनी बनाना।[3]
तृतीयक क्षेत्रक: यह क्षेत्रक प्राथमिक व द्वितीयक क्षेत्रकों के विकास में मदद करता है और सेवाएँ प्रदान करता है। उदाहरण: बैंकिंग, परिवहन, भंडारण।[3]
प्रश्न 2: संगठित और असंगठित क्षेत्रकों के बीच रोजगार की परिस्थितियों में क्या अंतर है?
उत्तर:
संगठित क्षेत्रक | असंगठित क्षेत्रक |
इसमें रोजगार की शर्तें नियमित होती हैं। | रोजगार की शर्तें अनियमित होती हैं। |
कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा प्राप्त होती है। | नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं होती है। |
सरकार के नियमों का पालन किया जाता है। | सरकारी नियमों का पालन नहीं किया जाता। |
सवेतन छुट्टी, भविष्य निधि जैसे लाभ मिलते हैं। | ऐसे किसी भी लाभ का प्रावधान नहीं होता है। |
वेतन सामान्यतः अधिक और नियमित होता है। | वेतन कम और अनियमित होता है। |
प्रश्न 3: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: मनरेगा 2005 के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:[2]
ग्रामीण क्षेत्रों में हर उस परिवार को, जिसे काम की ज़रूरत है, एक वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी देना।[2]
यदि सरकार रोजगार उपलब्ध कराने में असफल रहती है, तो वह लोगों को बेरोजगारी भत्ता देगी।[2]
भविष्य में भूमि से उत्पादन बढ़ाने में मदद करने वाले कामों को वरीयता देना।[4]
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)
प्रश्न 1: भारत में तृतीयक क्षेत्रक इतना महत्वपूर्ण क्यों होता जा रहा है? कारण बताइए।
उत्तर: भारत में तृतीयक क्षेत्रक के महत्वपूर्ण होने के निम्नलिखित कारण हैं:[5]
बुनियादी सेवाओं की आवश्यकता: किसी भी विकासशील देश में अस्पताल, शिक्षण संस्थाएँ, डाक, परिवहन, बैंक जैसी बुनियादी सेवाओं की आवश्यकता होती है, जिनकी जिम्मेदारी सरकार उठाती है।[5]
प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक का विकास: कृषि और उद्योग के विकास से परिवहन, व्यापार और भंडारण जैसी सेवाओं की मांग बढ़ती है।[5]
आय का बढ़ना: जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वे रेस्टोरेंट, पर्यटन, निजी स्कूल और निजी अस्पताल जैसी सेवाओं की अधिक मांग करने लगते हैं।[5]
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी: पिछले कुछ दशकों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नई सेवाएँ महत्वपूर्ण हो गई हैं और उनका उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारी नीतियां: सरकार द्वारा सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने भी इसके विकास में योगदान दिया है।
प्रश्न 2: “असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का शोषण किया जाता है।” क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस विचार से सहमत हूँ कि असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों का शोषण किया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
कम और अनियमित मज़दूरी: इन श्रमिकों को उचित वेतन नहीं मिलता और अक्सर न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जाता है।[4]
नौकरी की असुरक्षा: इन श्रमिकों को बिना किसी कारण के कभी भी काम से हटाया जा सकता है, जिससे उनकी नौकरी सुरक्षित नहीं रहती है।[3]
कोई सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं: उन्हें सवेतन छुट्टी, बीमारी की छुट्टी, भविष्य निधि या पेंशन जैसी कोई सुविधा नहीं मिलती है।[6]
काम के निश्चित घंटे नहीं: काम के घंटे निश्चित नहीं होते हैं और उनसे अतिरिक्त समय काम करने के लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता है।[3]
खराब कार्य परिस्थितियाँ: कार्यस्थल पर पीने के पानी या सुरक्षित वातावरण जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव होता है।
प्रश्न 3: सार्वजनिक क्षेत्रक किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्रक किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास में निम्नलिखित तरीकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:[3]
बुनियादी ढाँचे का निर्माण: यह सड़कों, पुलों, रेलवे, बिजली और बांधों जैसे भारी निवेश वाले बुनियादी ढाँचे का निर्माण करता है, जो निजी क्षेत्रक के लिए संभव नहीं होता।[5]
सामाजिक कल्याण: इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण होता है। यह उचित मूल्य पर सभी को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
रोजगार सृजन: सार्वजनिक क्षेत्रक रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।[5]
संतुलित क्षेत्रीय विकास: सरकार पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करके संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देती है।
लघु उद्योगों को सहायता: यह लघु उद्योगों को कच्चा माल खरीदने और उनके उत्पादों को बेचने में मदद करता है, जिससे उनका विकास होता है।
✅ अतिरिक्त तैयारी के लिए सुझाव:
- प्रत्येक क्षेत्र के उदाहरण याद रखें।
- GDP, मनरेगा, संगठित/असंगठित क्षेत्र पर आधारित उत्तर अच्छे से तैयार करें।
- चार्ट और तुलना आधारित प्रश्नों का अभ्यास करें।