जल संसाधन (Water Resources)
1. जल दुर्लभता (Water Scarcity)
पृथ्वी का लगभग तीन-चौथाई भाग जल से ढका है, लेकिन पीने योग्य (अलवणीय) जल बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है।
जल की कमी के मुख्य कारण हैं:
बढ़ती जनसंख्या
जल का अतिशोषण (Over-exploitation)
जल का असमान वितरण
खेती और उद्योगों में पानी का अत्यधिक उपयोग होने से भू-जल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
2. बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ और बाँध (Multi-purpose Projects and Dams)
बाँध क्या हैं?
बाँध बहते जल को रोकने या उसकी दिशा नियंत्रित करने के लिए बनाई गई एक संरचना है, जिससे जलाशय या कृत्रिम झील बनती है।
बाँधों के लाभ:
सिंचाई की सुविधा
जलविद्युत उत्पादन
बाढ़ नियंत्रण
मछली पालन
पर्यटन और मनोरंजन
इसी कारण इन्हें बहुउद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है।
नेहरू जी का विचार:
जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को “आधुनिक भारत के मंदिर” कहा क्योंकि ये कृषि, उद्योग और राष्ट्रीय विकास में सहायक हैं।
3. बाँधों से होने वाले नुकसान और विवाद
बाँध नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोकते हैं, जिससे जलीय जीव-जंतुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बड़े बाँधों के कारण स्थानीय लोगों को अपनी भूमि छोड़नी पड़ती है, जिससे विस्थापन की समस्या उत्पन्न होती है।
कई बार अत्यधिक वर्षा के समय बाँध बाढ़ नियंत्रण में असफल हो जाते हैं और बाढ़ का कारण बनते हैं।
4. वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)
प्राचीन भारत में वर्षा जल संरक्षण की उन्नत तकनीकें प्रचलित थीं।
क्षेत्रवार उदाहरण:
पहाड़ी क्षेत्र: पश्चिमी हिमालय में सिंचाई के लिए ‘गुल’ या ‘कुल’ नामक जल वाहिकाएँ बनाई जाती हैं।
राजस्थान: पीने के पानी के लिए भूमिगत टैंक बनाए जाते हैं जिन्हें ‘टाँका’ कहते हैं। यहाँ एकत्र जल को ‘पालर पानी’ कहा जाता है।
मेघालय: बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से बाँस के पाइपों द्वारा झरनों का पानी खेतों तक पहुँचाया जाता है।
कर्नाटक: गंडाथूर गाँव में छत आधारित वर्षा जल संग्रहण से जल संकट को दूर किया गया।
भाग 2: महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: जल दुर्लभता क्या है? इसके मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर:
जब जल की माँग उसकी उपलब्धता से अधिक हो जाती है, तो इस स्थिति को जल दुर्लभता कहते हैं। इसके मुख्य कारण हैं: (1) बढ़ती जनसंख्या और खाद्यान्न की बढ़ती माँग, (2) जल का अत्यधिक उपयोग एवं अतिशोषण, तथा (3) उद्योगों द्वारा जल प्रदूषण।
प्रश्न 2: जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को ‘आधुनिक भारत का मंदिर’ क्यों कहा?
उत्तर:
नेहरू जी का मानना था कि बाँधों से कृषि विकास, सिंचाई विस्तार, औद्योगीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ये परियोजनाएँ देश के समग्र विकास में सहायक हैं, इसलिए उन्होंने इन्हें आधुनिक भारत के मंदिर कहा।
प्रश्न 3: राजस्थान के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण कैसे किया जाता है?
उत्तर:
राजस्थान के बीकानेर, फलोदी और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों में पीने के पानी के लिए भूमिगत टैंक बनाए जाते हैं जिन्हें ‘टाँका’ कहा जाता है। ये घर या आँगन में बने होते हैं और छत से पाइप द्वारा जुड़े रहते हैं, जिससे वर्षा जल संग्रहित होता है।
प्रश्न 4: बहुउद्देशीय परियोजनाओं (बाँधों) से होने वाली तीन हानियाँ लिखिए।
उत्तर:
नदियों का प्राकृतिक बहाव रुकता है और जलीय जीव प्रभावित होते हैं।
बाढ़ के मैदान डूब जाते हैं, जिससे लोगों का विस्थापन होता है।
अत्यधिक वर्षा के समय बाँध बाढ़ नियंत्रण में असफल हो सकते हैं।
प्रश्न 5: ‘खादीन’ और ‘जोहड़’ क्या हैं?
उत्तर:
शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल को खेतों में रोकने के लिए बनाए गए संरचनात्मक गड्ढों को खादीन और जोहड़ कहा जाता है। जैसलमेर में इन्हें ‘खादीन’ तथा अन्य क्षेत्रों में ‘जोहड़’ कहा जाता है।
प्रश्न 6: बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली भारत के किस राज्य में प्रचलित है?
उत्तर:
यह प्रणाली मेघालय में प्रचलित है, जहाँ बाँस के पाइपों द्वारा झरनों और नदियों का पानी सैकड़ों मीटर दूर खेतों तक बूँद-बूँद पहुँचाया जाता है।
प्रश्न 7: प्राचीन भारत में जल संरक्षण के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ईसा से एक शताब्दी पूर्व इलाहाबाद के पास श्रृंगवेरपुर में गंगा की बाढ़ के जल को संरक्षित करने की उन्नत प्रणाली थी।
14वीं शताब्दी में इल्तुतमिश ने दिल्ली में हौज खास का निर्माण करवाया।
प्रश्न 8: जल को नवीकरण योग्य संसाधन क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
जल जलचक्र (Hydrological Cycle) के माध्यम से निरंतर पुनः निर्मित होता रहता है। वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा की प्रक्रिया से जल का नवीकरण होता है, इसलिए इसे नवीकरण योग्य संसाधन कहा जाता है।
प्रश्न 9: तमिलनाडु राज्य ने जल संरक्षण के लिए क्या कदम उठाया है?
उत्तर:
तमिलनाडु भारत का पहला राज्य है जहाँ प्रत्येक घर में छत वर्षा जल संग्रहण प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। नियमों का पालन न करने पर कानूनी कार्यवाही का प्रावधान है।
प्रश्न 10: उद्योगों के कारण जल संसाधनों पर क्या दबाव पड़ा है?
उत्तर:
उद्योगों को भारी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।
जलविद्युत उत्पादन के लिए जल का अधिक उपयोग किया जाता है।
औद्योगिक अपशिष्ट और रसायन जल को प्रदूषित कर उसे अनुपयोगी बना देते हैं।