भाग 1: कृषि (Agriculture)
1. कृषि का महत्व
- भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
- कृषि देश को भोजन उपलब्ध कराती है और उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करती है, जैसे कपास और गन्ना।
2. कृषि के प्रकार (Types of Farming)
(क) प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming)
- यह छोटे खेतों पर पारंपरिक औजारों (जैसे लकड़ी का हल) और पारिवारिक श्रम से की जाती है।
- यह पूरी तरह मानसून और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर होती है।
- इसे कर्तन-दहन प्रणाली (Slash and Burn) या झूम खेती भी कहा जाता है।
(ख) गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming)
- यह उन क्षेत्रों में प्रचलित है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।
- अधिक उत्पादन के लिए उर्वरकों, कीटनाशकों और सिंचाई का अधिक उपयोग किया जाता है।
(ग) वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming)
- इसका मुख्य उद्देश्य फसलों का उत्पादन कर उन्हें बाजार में बेचकर लाभ कमाना है।
- इसमें उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग होता है।
- उदाहरण: पंजाब में चावल, असम में चाय।
3. शस्य प्रारूप / फसल ऋतुएँ (Cropping Patterns)
भारत में तीन प्रमुख फसल ऋतुएँ पाई जाती हैं:
(क) रबी फसलें
- बुवाई: अक्तूबर–दिसंबर
- कटाई: अप्रैल–जून
- मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों
(ख) खरीफ फसलें
- बुवाई: जून–जुलाई (मानसून के साथ)
- कटाई: सितंबर–अक्तूबर
- मुख्य फसलें: चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, मूंगफली
(ग) ज़ायद फसलें
- रबी और खरीफ के बीच की अल्पकालीन गर्मी की फसलें
- मुख्य फसलें: तरबूज, खरबूजा, खीरा
4. मुख्य फसलें (Major Crops)
- चावल: भारत की प्रमुख खाद्य फसल; 25°C से अधिक तापमान और 100 सेमी से अधिक वर्षा की आवश्यकता।
- गेहूँ: ठंडी ऋतु में उगाया जाता है; पकने के समय धूप आवश्यक; 50–75 सेमी वर्षा उपयुक्त।
- मोटे अनाज (Millets): ज्वार, बाजरा और रागी; पोषक तत्वों से भरपूर, रागी में कैल्शियम और लोहा अधिक।
- गन्ना: उष्ण कटिबंधीय फसल; 21°C–27°C तापमान और 75–100 सेमी वर्षा आवश्यक; भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक।
- चाय: रोपण कृषि का उदाहरण; वर्ष भर कोष्ण, नम और पाला रहित जलवायु आवश्यक; असम और पश्चिम बंगाल प्रमुख उत्पादक।
5. अखाद्य फसलें (Non-Food Crops)
- कपास: काली मिट्टी में उगाई जाती है; उच्च तापमान, हल्की वर्षा और 210 पाला रहित दिन आवश्यक।
- जूट: ‘सुनहरा रेशा’ कहलाता है; बाढ़ के मैदानों की उपजाऊ मिट्टी में उगता है; बोरियाँ और रस्सियाँ बनाने में उपयोग।
6. कृषि सुधार (Agricultural Reforms)
- सरकार द्वारा हरित क्रांति और श्वेत क्रांति जैसी योजनाएँ लागू की गईं।
- किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और फसल बीमा योजना शुरू की गई।
- किसानों को उचित मूल्य दिलाने हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की जाती है।
- भूदान-ग्रामदान आंदोलन: विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया, जिसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा जाता है।
भाग 2: महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1: कर्तन-दहन प्रणाली या झूम खेती क्या है?
उत्तर: यह प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि का एक रूप है, जिसमें भूमि को साफ करने के लिए वनस्पति को जलाया जाता है और उस भूमि पर फसल उगाई जाती है। कुछ समय बाद भूमि छोड़ दी जाती है ताकि उसकी उर्वरता प्राकृतिक रूप से पुनः बढ़ सके।
प्रश्न 2: रबी और खरीफ फसलों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: रबी फसलें शीत ऋतु में बोई जाती हैं और ग्रीष्म ऋतु में काटी जाती हैं, जैसे गेहूँ और चना। खरीफ फसलें मानसून के साथ बोई जाती हैं और शरद ऋतु में काटी जाती हैं, जैसे चावल और मक्का।
प्रश्न 3: भारत में चावल की खेती के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए।
उत्तर: चावल के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता तथा 100 सेमी से अधिक वर्षा आवश्यक होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की सहायता से इसकी खेती की जाती है।
प्रश्न 4: चाय की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चाय के लिए उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ढलवाँ भूमि, ह्यूमस युक्त मिट्टी तथा वर्ष भर समान रूप से वर्षा और पाला रहित वातावरण आवश्यक होता है।
प्रश्न 5: गहन जीविका कृषि की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: यह कृषि अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है, श्रम-सघन होती है और सीमित भूमि से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई का अधिक प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 6: कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है और क्यों?
उत्तर: कपास के लिए काली मिट्टी सबसे उपयुक्त है क्योंकि इसमें नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है और यह उच्च तापमान तथा पाला रहित अवधि में अच्छी पैदावार देती है।
प्रश्न 7: भूदान-ग्रामदान आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: इस आंदोलन में बिना किसी हिंसा के जमींदारों ने अपनी अतिरिक्त भूमि स्वेच्छा से भूमिहीन किसानों को दान दी। इसलिए इसे रक्तहीन क्रांति कहा गया।
प्रश्न 8: भारतीय कृषि में सरकार द्वारा किए गए तीन संस्थागत सुधार लिखिए।
उत्तर: (1) चकबंदी और जमींदारी प्रथा का अंत, (2) फसल बीमा योजना, (3) किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा।
प्रश्न 9: जूट को ‘सुनहरा रेशा’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: जूट के सुनहरे रंग और इसके उच्च आर्थिक महत्व के कारण इसे ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है। इसका उपयोग बोरियाँ, रस्सियाँ और चटाइयाँ बनाने में होता है।
प्रश्न 10: दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता कैसे बढ़ाती हैं?
उत्तर: दलहनी फसलें वायुमंडल से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है। इसी कारण इन्हें फसल चक्र में शामिल किया जाता है।