कृतिका (भाग 1) – कक्षा 9 (हिंदी पूरक)
1️⃣ इस जल प्रलय में (फणीश्वर नाथ रेणु)
विषय:
बाढ़ की विभीषिका का आँखों देखा वर्णन (रिपोर्ताज)
विस्तृत सारांश:
लेखक ने 1967 में पटना में आई भयानक बाढ़ का वर्णन किया है। लेखक स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहते थे। जब शहर में पानी घुसने लगा, तो लोगों में भय और कौतूहल दोनों थे। लोग राशन, मोमबत्ती और दवाइयाँ जमा करने लगे। लेखक अपने मित्र के साथ शहर का जायजा लेने निकलते हैं और देखते हैं कि कैसे ‘मृत्यु का तरल दूत’ (बाढ़ का पानी) सब कुछ निगलता जा रहा है। यह पाठ आपदा के समय मानवीय व्यवहार और प्रशासनिक लाचारी को दिखाता है।
2️⃣ मेरे संग की औरतें (मृदुला गर्ग)
विषय:
संस्मरण (परिवार की महिलाओं का व्यक्तित्व)
विस्तृत सारांश:
लेखिका ने इस पाठ में अपनी नानी, दादी, माँ और चार बहनों के बारे में बताया है।
- नानी:
उन्होंने अपनी मृत्यु निकट देख अपने पति के मित्र (स्वतंत्रता सेनानी) से कहा कि उनकी बेटी की शादी किसी क्रांतिकारी से हो, न कि किसी अंग्रेज भक्त से। - माँ:
वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और एक की बात दूसरे से नहीं कहती थीं। वे बहुत पढ़ती थीं और सादगी से रहती थीं। - दादी:
वे लीक से हटकर चलती थीं। उन्होंने लेखिका की माँ के लिए पहली संतान ‘लड़की’ होने की मन्नत मांगी थी, जो उस समय के समाज में बड़ी बात थी।
मुख्य संदेश:
यह पाठ दिखाता है कि बिना शोर मचाए भी अपनी शर्तों पर स्वतंत्रता से जिया जा सकता है।
3️⃣ रीढ़ की हड्डी (जगदीश चंद्र माथुर)
विषय:
सामाजिक एकांकी (स्त्री-शिक्षा और रूढ़िवादिता पर प्रहार)
विस्तृत सारांश:
यह नाटक उमा नाम की एक लड़की के इर्द-गिर्द घूमता है। उमा बी.ए. पास है, लेकिन उसके पिता रामस्वरूप उसे देखने आने वाले लड़के वालों के सामने उसकी शिक्षा छिपाते हैं, क्योंकि लड़के वाले कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं।
लड़के का पिता गोपाल प्रसाद और लड़का शंकर उमा को किसी वस्तु की तरह देखते-परखते हैं। अंत में उमा भड़क जाती है और शंकर की कमियों को उजागर कर देती है—कि उसकी अपनी कोई रीढ़ की हड्डी नहीं है, वह चरित्रहीन है और दूसरों के दबाव में जीता है।
मुख्य संदेश:
स्त्रियों को भी सम्मान और शिक्षा का उतना ही अधिकार है जितना पुरुषों को।
4️⃣ माटी वाली (विद्या सागर नौटियाल)
विषय:
विस्थापन की समस्या (Displacement)
विस्तृत सारांश:
यह कहानी टिहरी (उत्तराखंड) की एक बूढ़ी औरत की है, जो पूरे शहर में लाल मिट्टी पहुँचाती है। उसके पास न खेत है, न घर—वह केवल माताखान (मिट्टी की खदान) के भरोसे है।
जब टिहरी बाँध के कारण शहर खाली कराया जाता है, तो माटी वाली के सामने सबसे बड़ी समस्या आती है—वह कहाँ जाए? उसके पास कोई प्रमाण पत्र नहीं है। अंत में वह अपने मृत पति के शव के पास बैठी रहती है और कहती है:
“गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए।”
मुख्य संदेश:
यह पाठ विकास के नाम पर बेघर होने वाले गरीब लोगों के दर्द को उजागर करता है।
📝 कृतिका के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (परीक्षा हेतु)
- ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के माध्यम से लेखक ने समाज की किस कमी की ओर इशारा किया है?
- ‘माटी वाली’ का रोटियों का हिसाब रखना उसकी किस स्थिति को दर्शाता है?
- लेखिका की नानी के मन में आज़ादी के प्रति कैसा जुनून था?
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📘 कृतिका (भाग 1) – कक्षा 9
🔥 अति महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Exam Oriented)
कृतिका (भाग 1) के प्रत्येक अध्याय से परीक्षा में पूछे जाने वाले अति महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर यहाँ दिए गए हैं। ये उत्तर आपकी वैचारिक स्पष्टता बढ़ाने और अच्छे अंक लाने में मदद करेंगे।
अध्याय 1: इस जल प्रलय में (फणीश्वर नाथ रेणु)
प्रश्न 1: बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे?
उत्तर:
बाढ़ की खबर सुनकर लोग अपनी सुरक्षा और दैनिक जरूरतों के लिए तैयारी करने लगे। उन्होंने गैस, मिट्टी का तेल, मोमबत्ती, दियासलाई, पीने का पानी और खाने के लिए चूड़ा-गुड़ और आलू आदि का प्रबंध कर लिया। लोग अपनी दुकानों से सामान हटाकर ऊपर की मंजिलों पर ले जाने लगे ताकि आर्थिक नुकसान कम हो।
प्रश्न 2: ‘मृत्यु का तरल दूत’ किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
बाढ़ के तेज गति से आते हुए मटमैले पानी को ‘मृत्यु का तरल दूत’ कहा गया है। इसका कारण यह है कि यह पानी बड़ी तेजी से सब कुछ डुबोता हुआ आगे बढ़ रहा था। जो भी इसकी चपेट में आता, उसकी मृत्यु निश्चित थी। यह पानी शांति से नहीं बल्कि भयानक गड़गड़ाहट के साथ मौत बनकर आ रहा था।
अध्याय 2: मेरे संग की औरतें (मृदुला गर्ग)
प्रश्न 1: लेखिका की नानी की आजादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?
उत्तर:
लेखिका की नानी ने प्रत्यक्ष रूप से आंदोलन में भाग नहीं लिया, लेकिन उनके मन में आजादी के प्रति गहरा जुनून था। उन्होंने अपनी मृत्यु निकट पाकर अपने पति के मित्र स्वतंत्रता सेनानी प्यारेलाल शर्मा से अपनी बेटी (लेखिका की माँ) की शादी किसी ऐसे व्यक्ति से करने का वचन लिया जो ‘साहबों का आज्ञाकारी’ न होकर एक क्रांतिकारी हो। इस प्रकार उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के माध्यम से देशप्रेम प्रकट किया।
प्रश्न 2: शिक्षा के क्षेत्र में लेखिका के प्रयासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कर्नाटक के छोटे से कस्बे बागलकोट में जब लेखिका के बच्चों के लिए कोई स्कूल नहीं था, तो उन्होंने स्वयं प्रयास किया। उन्होंने कैथोलिक बिशप से स्कूल खोलने का अनुरोध किया, और मना होने पर स्थानीय लोगों की मदद से एक प्राइमरी स्कूल खोला। वहाँ अंग्रेजी, हिंदी और कन्नड़ तीन भाषाएँ पढ़ाने की व्यवस्था की और उसे सरकार से मान्यता भी दिलवाई।
अध्याय 3: रीढ़ की हड्डी (जगदीश चंद्र माथुर)
प्रश्न 1: रामस्वरूप अपनी बेटी (उमा) की शिक्षा क्यों छिपाते हैं?
उत्तर:
रामस्वरूप एक प्रगतिशील पिता हैं जिन्होंने अपनी बेटी को बी.ए. तक पढ़ाया है, लेकिन उस समय का समाज पढ़ी-लिखी बहू को सहज रूप से स्वीकार नहीं करता था। उमा को देखने आने वाले गोपाल प्रसाद चाहते थे कि उनकी बहू ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो ताकि वह घर के कायदे-कानूनों में दबी रहे। इसी सामाजिक दबाव में रामस्वरूप उमा की शिक्षा छिपाते हैं।
प्रश्न 2: शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की—समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है?
उत्तर:
समाज को उमा जैसे व्यक्तित्व की जरूरत है। उमा शिक्षित, निडर और स्वाभिमानी है। वह रूढ़िवादी परंपराओं और दिखावे का डटकर विरोध करती है। इसके विपरीत शंकर जैसे लड़के रीढ़विहीन होते हैं, जो दूसरों के इशारों पर चलते हैं। समाज का विकास उमा जैसी साहसी और आत्मसम्मानी लड़कियों से ही संभव है।
अध्याय 4: माटी वाली (विद्या सागर नौटियाल)
प्रश्न 1: “गरीब आदमी का श्मशान नहीं उजड़ना चाहिए”—इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह कथन विस्थापन की त्रासदी को दर्शाता है। टिहरी बाँध के कारण शहर खाली कराया जा रहा था और माटी वाली के सामने न केवल रहने का संकट था, बल्कि उसका रोजगार भी छिन गया था। उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी और उसके पास अंतिम संस्कार के लिए जमीन तक नहीं बची थी। यह पंक्ति गरीब व्यक्ति की उस बेबसी को दिखाती है जहाँ उसके पास मरने के बाद भी जगह नहीं बचती।
प्रश्न 2: माटी वाली का रोटियों का हिसाब रखना उसकी किस मजबूरी को दर्शाता है?
उत्तर:
माटी वाली का रोटियों का हिसाब रखना उसकी अत्यंत गरीबी और भुखमरी को दर्शाता है। वह एक-एक रोटी बचाकर अपने बीमार और बूढ़े पति को खिलाती है और स्वयं आधा पेट या पानी पीकर गुजारा करती है। इससे पता चलता है कि एक गरीब मजदूर के लिए दो वक्त की रोटी सबसे बड़ी चिंता होती है।
📝 परीक्षा की तैयारी के लिए मुख्य टिप्स
- पात्रों का स्वभाव:
उमा, माटी वाली और लेखिका की नानी के चरित्र-गुणों पर विशेष ध्यान दें। - सामाजिक संदेश:
उत्तरों में विस्थापन, स्त्री-शिक्षा, मानवीय संवेदना, सामाजिक रूढ़ियाँ जैसे शब्दों का प्रयोग जरूर करें। - भाषा शैली:
उत्तर साफ, सरल और बिंदुवार लिखें—इससे परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
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