अध्याय 12: खाद्य संसाधनों में सुधार (Improvement in Food Resources)
यहाँ कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 12 के सरल हिंदी नोट्स, सारांश और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं। यह सामग्री NCERT के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है।
अध्याय सारांश (Chapter Summary)
1. सुधार की आवश्यकता क्यों?
भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है और यह लगातार बढ़ रही है। बढ़ती जनसंख्या की भोजन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हमें फसल और पशुधन के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए हरित क्रांति (अनाज उत्पादन) और श्वेत क्रांति (दूध उत्पादन) जैसे प्रयास किए गए हैं।
2. फसल उत्पादन में उन्नति (Improvement in Crop Yields)
फसलों को तीन मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है:
- अनाज (Cereals): (जैसे गेहूं, चावल, मक्का) – कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं (ऊर्जा के लिए)।
- दालें (Pulses): (जैसे चना, मटर, अरहर) – प्रोटीन प्रदान करती हैं।
- तिलहन (Oilseeds): (जैसे सोयाबीन, मूंगफली, सरसों) – वसा (Fat) प्रदान करते हैं।
- सब्जियां, मसाले और फल: विटामिन और खनिज लवण प्रदान करते हैं।
फसलों को मौसम के आधार पर दो भागों में बांटा गया है:
- खरीफ फसल (Kharif Crops): वर्षा ऋतु में उगाई जाती हैं (जून से अक्टूबर)। उदा: धान, सोयाबीन, मक्का।
- रबी फसल (Rabi Crops): शीत ऋतु में उगाई जाती हैं (नवंबर से अप्रैल)। उदा: गेहूं, चना, मटर, सरसों।
3. फसल सुधार के चरण
फसल उत्पादन में सुधार तीन चरणों में किया जाता है:
A. फसल की किस्म में सुधार (Crop Variety Improvement):
- अच्छी उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उर्वरक के प्रति अनुक्रिया के लिए संकरण (Hybridisation) विधि का उपयोग किया जाता है।
- इसमें आनुवंशिक रूप से भिन्न पौधों में क्रॉस कराया जाता है।
- ऐच्छिक गुण: उच्च उत्पादन, उन्नत किस्में, जैविक (कीट, रोग) और अजैविक (सूखा, गर्मी) प्रतिरोध।
B. फसल उत्पादन प्रबंधन (Crop Production Management):
- पोषक प्रबंधन: पौधों को हवा, पानी और मिट्टी से 16 पोषक तत्व मिलते हैं।
- वृहत् पोषक (Macro-nutrients): जिनकी अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है (जैसे- नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम)।
- सूक्ष्म पोषक (Micro-nutrients): जिनकी कम मात्रा में आवश्यकता होती है (जैसे- लोहा, मैंगनीज, जिंक)।
- खाद और उर्वरक:
- खाद (Manure): यह जंतुओं के अपशिष्ट और पौधों के कचरे के अपघटन से बनती है। यह मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता बढ़ाती है (जैसे- कंपोस्ट, हरी खाद)।
- उर्वरक (Fertilizers): ये कारखानों में बने रासायनिक पदार्थ हैं (जैसे- यूरिया, पोटाश)। ये तुरंत पोषक तत्व देते हैं लेकिन इनका अधिक उपयोग मिट्टी को खराब कर सकता है।
- सिंचाई (Irrigation): कुएं, नहरें, नदी जल उठाव प्रणाली और तालाब।
- फसल पैटर्न (Cropping Patterns):
- मिश्रित खेती (Mixed Cropping): दो या अधिक फसलों को एक साथ उगाना (उदा: गेहूं + चना)।
- अंतराफसलीकरण (Inter-cropping): दो या अधिक फसलों को एक निश्चित कतार में उगाना (उदा: सोयाबीन + मक्का)।
- फसल चक्र (Crop Rotation): एक ही खेत में क्रमवार विभिन्न फसलें उगाना।
C. फसल सुरक्षा प्रबंधन (Crop Protection Management):
- खरपतवार (अवांछित पौधे), कीट और रोगों से फसल को बचाना।
- भंडारण: अनाज को सुरक्षित रखने के लिए नमी, तापमान, और चूहों/कीड़ों (जैविक/अजैविक कारकों) से बचाना जरूरी है।
4. पशुपालन (Animal Husbandry)
पशुधन के प्रबंधन को पशुपालन कहते हैं।
- पशु कृषि (Cattle Farming): दूध देने वाले पशु (दुधारू) और खेती का काम करने वाले पशु (ड्राफ्ट पशु)। भारतीय नस्लें जैसे साहीवाल और विदेशी नस्लें जैसे जर्सी का संकरण कराकर अच्छी नस्लें प्राप्त की जाती हैं।
- कुक्कुट पालन (Poultry Farming): अंडे (लेअर) और मांस (ब्रौलर) के लिए मुर्गियां पालना।
- मत्स्य पालन (Fish Production):
- समुद्री मछली पकड़ना और अंतःस्थली (तालाब/नदी) मछली पालन।
- मिश्रित मछली संवर्धन (Composite Fish Culture): एक ही तालाब में 5-6 प्रकार की मछलियाँ पालना जो भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा न करें (जैसे- कतला (सतह), रोहू (मध्य), मृगल (तली))।
- मधुमक्खी पालन (Bee Keeping): शहद और मोम के लिए। इटेलियन मक्खी (एपिस मेलीफेरा) का उपयोग अधिक शहद उत्पादन के लिए किया जाता है क्योंकि यह डंक कम मारती है।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: वृहत् पोषक (Macronutrients) क्या हैं और इन्हें यह नाम क्यों दिया गया है?
उत्तर: वे पोषक तत्व जिनकी पौधों को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, वृहत् पोषक कहलाते हैं। मिट्टी से प्राप्त 13 पोषकों में से 6 वृहत् पोषक हैं: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर।
प्रश्न 2: खाद और उर्वरक में दो मुख्य अंतर लिखिए।
उत्तर:
- खाद एक कार्बनिक पदार्थ है जो प्राकृतिक अपघटन से बनती है और मिट्टी में ह्यूमस जोड़ती है।
- उर्वरक अकार्बनिक रसायन होते हैं जो कारखानों में बनते हैं और विशेष पोषक (जैसे NPK) प्रदान करते हैं, लेकिन ह्यूमस नहीं देते।
प्रश्न 3: मिश्रित खेती और अंतराफसलीकरण में क्या अंतर है?
उत्तर:
- मिश्रित खेती: इसमें दो या अधिक फसलों के बीजों को मिलाकर एक साथ बोया जाता है। कोई निश्चित कतार (row) पैटर्न नहीं होता (उदा: गेहूं + सरसों)।
- अंतराफसलीकरण: इसमें दो या अधिक फसलों को एक ही खेत में निश्चित कतार पैटर्न (जैसे 1 कतार सोयाबीन, 1 कतार मक्का) में उगाया जाता है।
प्रश्न 4: अनाज, दाल और फलों से हमें मुख्य रूप से क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
- अनाज: कार्बोहाइड्रेट (ऊर्जा के लिए)।
- दालें: प्रोटीन (शरीर निर्माण के लिए)।
- फल/सब्जियां: विटामिन और खनिज लवण।
प्रश्न 5: जी.एम. फसल (Genetically Modified Crop) क्या है?
उत्तर: वह फसल जिसे किसी दूसरे स्रोत से ऐच्छिक गुण वाला जीन डालकर विकसित किया गया हो, उसे आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (GM) फसल कहते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 6: फसल सुरक्षा प्रबंधन में अनाज भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान के लिए कौन से कारक उत्तरदायी हैं?
उत्तर: भंडारण के दौरान नुकसान दो प्रकार के कारकों से होता है:
- जैविक कारक (Biotic Factors): कीड़े, कृंतक (चूहे), कवक, चिंचड़ी और जीवाणु।
- अजैविक कारक (Abiotic Factors): भंडारण स्थान पर अनुचित नमी और तापमान।
ये कारक अनाज की गुणवत्ता खराब करते हैं, वजन कम करते हैं, और अंकुरण क्षमता को नष्ट कर देते हैं।
प्रश्न 7: मिश्रित मछली संवर्धन (Composite Fish Culture) के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
इस प्रणाली में देशी और आयातित मछलियों की 5-6 प्रजातियों का प्रयोग एक ही तालाब में किया जाता है।
- ऐसी मछलियों को चुना जाता है जिनके आहार की आदतें अलग-अलग हों ताकि वे आपस में भोजन के लिए प्रतिस्पर्धा न करें।
- उदाहरण: कतला (जल की सतह से), रोहू (तालाब के मध्य से), और मृगल (तली से) भोजन लेती हैं।
- लाभ: इससे तालाब के सभी भागों में उपलब्ध भोजन का उपयोग हो जाता है और मछली उत्पादन में भारी वृद्धि होती है।
प्रश्न 8: हरी खाद (Green Manure) क्या है? यह कैसे तैयार की जाती है?
उत्तर: फसल उगाने से पहले खेतों में कुछ पौधे जैसे सनई (Sun hemp) या ग्वार उगाए जाते हैं और फिर उन पर हल चलाकर उन्हें खेत की मिट्टी में ही मिला दिया जाता है। ये पौधे मिट्टी में अपघटित होकर हरी खाद बन जाते हैं जो मिट्टी को नाइट्रोजन और फास्फोरस से परिपूर्ण करते हैं。
प्रश्न 9: फसल की किस्मों में सुधार के लिए किन कारकों (गुणों) को ध्यान में रखा जाता है?
उत्तर:
- उच्च उपज: प्रति एकड़ फसल का उत्पादन बढ़ाना।
- उन्नत किस्में: दालों में प्रोटीन की गुणवत्ता, तिलहन में तेल की गुणवत्ता आदि।
- जैविक तथा अजैविक प्रतिरोधकता: कीड़ों, रोगों (जैविक) और सूखा, गर्मी, ठंड (अजैविक) के प्रति सहनशीलता।
- परिपक्वता काल में परिवर्तन: फसल के बोने से कटाई तक का समय कम होना आर्थिक रूप से अच्छा है।
- व्यापक अनुकूलता: ऐसी किस्में जो विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में उग सकें।